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एक साथ क्यों धधक रहे ज्वालामुखी? 6 देशों में राख और लावा ने बढ़ाई चिंता, वैज्ञानिकों ने बताया सच

मैक्सिको, कोलंबिया, इटली, जापान, ग्वाटेमाला और इंडोनेशिया में ज्वालामुखीय गतिविधियां दर्ज हुई हैं. राख, गैस और लावा निकलने की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है, लेकिन विशेषज्ञ इन्हें आपस में जुड़ा नहीं मानते.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
एक साथ क्यों धधक रहे ज्वालामुखी? 6 देशों में राख और लावा ने बढ़ाई चिंता, वैज्ञानिकों ने बताया सच
Courtesy: Pinterest

पिछले 48 घंटों में दुनिया के कई हिस्सों से ज्वालामुखियों की गतिविधि बढ़ने की खबरें सामने आई हैं. छह देशों में कहीं राख और गैस निकली, तो कहीं लावा बहने की सूचना मिली. इन घटनाओं ने लोगों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या धरती के भीतर कोई बड़ा बदलाव हो रहा है. हालांकि, ज्वालामुखी विशेषज्ञों के अनुसार अलग-अलग देशों में हो रही इन गतिविधियों को एक ही घटना से जोड़ना उचित नहीं है.

मैक्सिको से इटली तक बढ़ी हलचल

मैक्सिको के पोपोकाटेपेटल पर लगातार निगरानी रखी जाती है, जहां समय-समय पर राख और गैस निकलती रहती है. इटली में एटना और स्ट्रॉम्बोली भी सक्रिय ज्वालामुखियों में शामिल हैं. हालिया गतिविधियों में एटना में हलचल बढ़ने और स्ट्रॉम्बोली से लावा निकलने की जानकारी सामने आई है. अधिकारियों और वैज्ञानिकों की नजर इन ज्वालामुखियों के व्यवहार पर बनी हुई है.

जापान और इंडोनेशिया में भी गतिविधि

जापान का सकुराजिमा लंबे समय से सक्रिय ज्वालामुखियों में गिना जाता है. इंडोनेशिया में भी कई ज्वालामुखी लगातार गतिविधि दिखाते हैं. स्मिथसोनियन के ग्लोबल वोलकैनिज्म प्रोग्राम के अनुसार, दुनिया में किसी भी समय करीब 40 से 50 ज्वालामुखी सक्रिय हो सकते हैं. इसलिए अलग-अलग जगहों पर एक साथ गतिविधि दिखाई देना अपने आप में असामान्य नहीं माना जाता.

ग्वाटेमाला और कोलंबिया पर नजर

ग्वाटेमाला का फुएगो ज्वालामुखी भी हाल में सक्रिय रहा है. इससे राख और लावा निकलने की सूचना मिली है. यह मध्य अमेरिका के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में शामिल है. कोलंबिया में भी वैज्ञानिक कई ज्वालामुखियों की निगरानी कर रहे हैं. गैस, राख और जमीन के भीतर होने वाली हलचल के आंकड़ों से वैज्ञानिक गतिविधि में बदलाव का अनुमान लगाते हैं.

क्या किसी बड़े खतरे की आहट है?

छह देशों में ज्वालामुखीय गतिविधि दिखने के बावजूद इसे किसी वैश्विक खतरे का संकेत नहीं माना जा रहा है. ज्वालामुखी धरती के भीतर मैग्मा और गैसों की हलचल के कारण सक्रिय होते हैं. हर ज्वालामुखी की अपनी भूगर्भीय स्थिति होती है, इसलिए सभी घटनाओं का एक-दूसरे से संबंध होना जरूरी नहीं. स्मिथसोनियन के आंकड़ों के अनुसार 2025 में 63 ज्वालामुखियों से 71 विस्फोट दर्ज किए गए थे.

वैज्ञानिक हर ज्वालामुखी पर अलग नजर रख रहे

वैज्ञानिक राख की दिशा, लावा की मात्रा और जमीन के भीतर होने वाली हलचल पर लगातार नजर रखते हैं. इन संकेतों से यह समझने में मदद मिलती है कि किसी ज्वालामुखी की गतिविधि बढ़ रही है या घट रही है. यदि किसी क्षेत्र में जोखिम बढ़ता है, तो स्थानीय प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने समेत जरूरी कदम उठा सकता है. फिलहाल छह देशों की घटनाओं का अलग-अलग अध्ययन किया जा रहा है.