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India Daily

अफ्रीका के इस देश के भयानक तट पर पलटी नाव, डूबने से 69 की दर्दनाक मौत

मोरक्को में हुई यह नाव दुर्घटना पश्चिमी अफ़्रीका से यूरोप जाने वाले प्रवासियों के लिए एक काली छाया साबित हो रही है. माली और अन्य देशों के नागरिकों के लिए यूरोप की ओर अवैध पलायन एक बड़ा जोखिम बन चुका है.

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Edited By: Mayank Tiwari
अफ्रीका के इस देश के भयानक तट पर पलटी नाव, डूबने से 69 की दर्दनाक मौत
Courtesy: Social Media

Boat Accident: पश्चिमी अफ़्रीका से स्पेन जा रही एक नाव के मोरक्को में पलटने से कम से कम 69 लोगों की मौत हो गई है. यह हादसा एक "अस्थायी नाव" पर हुआ, जो करीब 80 यात्रियों को लेकर यात्रा कर रही थी. माली के अधिकारियों के अनुसार, मारे गए लोगों में से 25 माली के नागरिक थे, और इस हादसे में सिर्फ़ 11 लोग बच पाए हैं. जिनमें से नौ माली के हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये नाव पिछले हफ्ते डूबी थी, लेकिन माली ने इसकी पुष्टि अब की है. माली ने अपने क्राइसिस यूनिट को हालात का निरीक्षण लेने के लिए भेजा है. माली काफी लंबे समय से जिहादी और अलगाववादी हिंसा का शिकार रहा है. इसकी वजह से देश में साल 2020 और 2021 में सैन्य तख्तापलट हुए. सैन्य सरकार ने मार्च 2024 में आम चुनाव के लिए वादा किया था, मगर, ये चुनाव अभी तक नहीं हुए हैं.

अवैध तरीके से लोग यूरोप पहुंचने के लिए अटलांटिक रूट का कर रहे इस्तेमाल

बता दें कि, देश के हालात के मद्देनज़र बहुत बड़ी संख्या में लोग अवैध तरीके से यूरोप पहुंचने के लिए अटलांटिक रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं. ये दुनिया का सबसे खतरनाक मार्ग है. वहीं, इस हफ्ते जारी अपनी सालाना रिपोर्ट में समूह ने कहा कि 2024 में अफ्रीका के अटलांटिक तट से स्पेन के द्वीपसमूह तक पहुंचने की कोशिश में 9,757 प्रवासी समुद्र में मारे गए. रिपोर्ट के अनुसार, इस साल सभी मार्गों से स्पेन पहुंचने की कोशिश में रिकॉर्ड 10,457 लोग - या लगभग 30 लोग प्रतिदिन - मारे गए.

सहेल क्षेत्र से जाने वाले प्रवासियों के लिए ये रूट रहा घातक

हालांकि, मॉरिटानिया से प्रस्थान करने वाला मार्ग, जिसका इस्तेमाल इस साल सहेल क्षेत्र से जाने वाले प्रवासियों द्वारा विशेष रूप से किया गया है, सबसे घातक रहा, जिसमें 6,829 लोगों की मौत हुई. वॉकिंग बॉर्डर्स ने समुद्र में मौतों में वृद्धि के लिए कार्रवाई की कमी या मनमाने बचाव और प्रवासियों के अपराधीकरण को जिम्मेदार ठहराया. इसके साथ ही सरकारों पर "जीवन के अधिकार पर आव्रजन नियंत्रण को प्राथमिकता देने" का आरोप लगाया.