नई दिल्ली: ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने हार्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अब इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के प्रबंधन में नया दौर शुरू हो गया है. अमेरिका-इजराइल के हमलों का जिक्र करते हुए खामेनी ने साफ कहा कि हमलावरों को सजा मिलेगी और ईरान हर नुकसान का मुआवजा वसूलेगा.
उन्होंने अपने पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत का बदला लेने का संकल्प जताया. ईरान युद्ध नहीं चाहता था लेकिन अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा. अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का नाजुक सीजफायर चल रहा है. लेबनान में नई झड़पों से यह कमजोर पड़ रहा है.
मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान हार्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को नई दिशा दे रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हम हर नुकसान का मुआवजा लेंगे, शहीदों के खून की कीमत वसूल करेंगे और घायलों का पूरा हर्जाना मांगेंगे. उनके बयान में बदला लेने का मजबूत इरादा दिखा. उन्होंने कहा कि हम युद्ध नहीं चाहते लेकिन अपने हकों की रक्षा जरूर करेंगे. यह बयान ऐसे समय में आया जब सीजफायर के बावजूद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है. खामेनेई ने हमलावरों को चेतावनी दी कि उन्हें बिना सजा नहीं छोड़ा जाएगा.
सीजफायर के तहत ईरान ने हार्मुज से रोजाना सिर्फ 15 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है. एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने रूसी एजेंसी टास को बताया कि हर जहाज को ईरान की पूर्व मंजूरी लेनी होगी और एक खास प्रोटोकॉल का पालन करना होगा. इस नई व्यवस्था की निगरानी आईआरजीसी कर रही है. सूत्र ने कहा कि युद्ध से पहले जैसी खुली स्थिति अब कभी वापस नहीं आएगी. इस नई फ्रेमवर्क को क्षेत्रीय देशों को बता दिया गया है. फिलहाल जहाजों की आवाजाही बहुत कम है.
खामेनेई ने अपने पिता की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान कभी चुप नहीं बैठेगा. उन्होंने कहा कि शहीदों के खून का बदला जरूर लिया जाएगा. यह सिर्फ उनके परिवार तक सीमित नहीं है बल्कि सभी शहीदों और घायलों के लिए होगा. ईरान हर नुकसान का मुआवजा मांगेगा और अगर इनकार किया गया तो सख्त कदम उठाए जाएंगे. बयान में कहा गया कि कुछ बदला तो लिया जा चुका है लेकिन पूरा हिसाब अभी बाकी है. इस मजबूत रुख से क्षेत्र में शांति की उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं.
हार्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब एक पांचवां हिस्सा संभालता है. ईरान की नई नीति से जहाजों की संख्या बहुत कम हो गई है. आईआरजीसी की मंजूरी और प्रोटोकॉल के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं. कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर दिख रहा है और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है. ईरान ने साफ कर दिया है कि पुरानी खुली व्यवस्था वापस नहीं आएगी.