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लैब में बनाए और छोड़ दिए लाखों मच्छर, आखिर इस देश में क्यों हो रहा ये अजीब प्रयोग?

अफ्रीकी देश ने लाखों मच्छरों को छोड़ा है. यह एक वैज्ञानिक प्रयोग है जिससे मच्छरों की एक ऐसी प्रजाति को फैलने से रोकना है, जो मलेरिया जैसी बीमारी फैलाते हैं.

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India Daily Live

पूरी दुनिया मच्छरों से परेशान है. मच्छर से कई तरह की बीमारियां पैदा होती है, लेकिन अफ्रीकी देश जिबूती में लाखों मच्छरों को वातावरण में छोड़ा गया. दरअसल, मच्छरों से फैलने वाली बीमारी के इलाज के लिए अमेरिका में एक विशेष प्रयास किया जा रहा है. इससे मच्छरों की एक ऐसी प्रजाति को फैलने से रोकना है, जो मलेरिया की बीमारी फैलाते हैं. यह मच्छर एडिस एजिप्टाई  प्रजाति के हैं जो जीका-डेंग्यू जैसी बीमारियां फैलाते हैं.

छोड़े गए मच्छर काटते नहीं है. इन्हें एक विषेश लैब में बनाया गया है. कई तरह के बीमारियां मच्छर के कटाने से फैलती है. केवल मादा मच्छर ही काटते हैं और नर मच्छर प्रजनन करेंगे जिससे मच्छरों की जनसंख्या कम हो जाएगी. इस तरह के प्रयोग पहले भी होते रहे हैं. 

कई देशों में हो चुका है ये प्रयोग

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि इसी तरह की तकनीकों को पहले ब्राज़ील, केमैन द्वीप समूह, पनामा और भारत में आजमाया गया था और वो काफ़ी कामयाब रही थीं. सीडीसी का कहना है कि 2019 के बाद से पूरी दुनिया में एक अरब से ज़्यादा जेनेटिकली मॉडिफाइड मच्छर खुले माहौल में छोड़े जा चुके हैं.  2021 में ही ऑक्सीटेन ने 144 हजार अनुवांशिक रूप से संशोधित मच्छर फ्लोरीडा के इलाकों में छोड़े थे.

कुछ जानकारों ने जताई आपत्ति

वैज्ञानिकों का कहना है कि लैब में बने मच्छर और जंगली नस्ल के मच्छरों से पैदा हुए मच्छरों में केलव नर ही बचते हैं. लेकिन कुछ दिन बाद वो भी मर जाते हैं. साथ ही इन मच्छरों में जेनेटिक मार्कर रहोगा जिससे वे इन्हें मच्छरों की जनसंख्या में ही आसानी से पहचान सकेंगे. हालांकि कुछ जानकारों को इससे आपत्ति है, उनका कहना है कि एक बार छोड़े जाने के बाद इन्हें कंट्रोल नहीं किया जा सका तो क्या होगा? इसके कई साइडइफैक्ट्स भी हो सकते हैं. 

मलेरिया जैसी बीमारी को खत्म करने की कोशिश

इस प्रयोग से एनोफेलीज स्टीफेंसी मच्छरों की नस्ल को रोकने की कोशिश की जा रही है. इसके काटने से मलेरिया की बीमारी होती है. अफ्रीकी देश जिबूती, मलेरिया को जड़ से खत्म बोने वाला था, लेकिन तब देश में मलेरिया के 30 मरीज फिर से पाए गए थे. मच्छरों की ये नस्ल अब अफ्रीका के छह अन्य देशों- इथियोपिया, सोमालिया, कीनिया, सूडान, नाइजीरिया और घाना में भी पाई जाती है.