France Protest News: फ्रांस में इन दिनों जनता का गुस्सा सड़कों पर उबाल मार रहा है. भ्रष्टाचार और आर्थिक नीतियों के खिलाफ भड़का यह आंदोलन देश को अस्थिरता की ओर धकेल रहा है. राजधानी पेरिस से लेकर बोर्डो और मार्सिले जैसे प्रमुख शहरों तक प्रदर्शनकारियों ने परिवहन व्यवस्था को ठप कर दिया है. बुधवार सुबह शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. आइए, इस संकट की गहराई को समझते हैं.
'ब्लॉक एवरीथिंग' अभियान ने मचाया कोहराम
फ्रांस में 'ब्लॉक एवरीथिंग' नामक अभियान ने सड़कों पर अराजकता फैला दी है. प्रदर्शनकारियों ने नकाब पहनकर कचरे के डिब्बों और बैरिकेड्स से सड़कें जाम कर दीं.
🇫🇷 Patriots flood French streets demanding Macron’s resignation and freedom from EU control. Protesters chant for sovereignty, independence, and an end to globalist rule.
— REST Media (@RESTinvestigate) September 10, 2025
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पेरिस में 200 लोग गिरफ्तार
पेरिस में अकेले 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस का कहना है, "गिरफ्तार किए गए अधिकतर लोग सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की कोशिश कर रहे थे." बोर्डो और मार्सिले में भीड़ ने चौराहों को घेर लिया, जबकि पेरिस के प्रमुख रेलवे हब गारे दू नॉर स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने धावा बोला. पुलिस पर फ्लेयर्स और बोतलें फेंकी गईं, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने सख्ती दिखाई. अधिकारियों का अनुमान है कि जैसे-जैसे दिन चढ़ेगा, यह आंदोलन और उग्र हो सकता है
सरकार पर गहराया संकट
यह हिंसक आंदोलन ऐसे समय में भड़का है, जब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने महज 24 घंटे पहले नए प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू की नियुक्ति की है. पूर्व प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरो को सोमवार रात संसद में अविश्वास प्रस्ताव में हार का सामना करना पड़ा था.
🚨BREAKING: Civil unrest ERUPTS across France as protesters flood the streets, causing widespread disruption.
— The British Patriot (@TheBritLad) September 10, 2025
Their goal: cripple the economy and get Macron out.
The French Revolution has begun. pic.twitter.com/k7ml77n4eU
जनता को रास नहीं आई कर्ज के लिए कटौती
बायरो ने देश का कर्ज कम करने के लिए 35 अरब यूरो (लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये) की कटौती योजना पेश की थी, लेकिन यह जनता को रास नहीं आई. नतीजतन, उनकी सरकार गिर गई. अब नए पीएम के सामने जनता का गुस्सा शांत करने और स्थिरता लाने की बड़ी चुनौती है.
80,000 पुलिसकर्मी तैनात, लूटपाट की आशंका
सरकार ने हालात पर काबू पाने के लिए 80,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात किया है. प्रदर्शनकारी न केवल सड़क और रेल यातायात को रोक रहे हैं, बल्कि तेल डिपो, सुपरमार्केट और पेट्रोल पंपों को भी निशाना बना रहे हैं. सोशल मीडिया पर कुछ समूहों ने तो दुकानों में लूटपाट की अपील तक की है. यह आंदोलन फ्रांस के कुख्यात 'यलो वेस्ट्स' आंदोलन की याद दिला रहा है, जिसने कुछ साल पहले मैक्रों को अपनी नीतियों में बदलाव करने के लिए मजबूर किया था.
क्या है जनता की मांग
फ्रांस की जनता आर्थिक कटौती और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है. बायरो की कटौती योजना ने जनता में असंतोष को और बढ़ा दिया. प्रदर्शनकारी सरकार से पारदर्शिता और बेहतर नीतियों की मांग कर रहे हैं. यह आंदोलन न केवल सड़कों पर बल्कि संसद में भी अस्थिरता का कारण बन रहा है. प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरो के इस्तीफे के बाद फ्रांस की जनता राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भी इस्तीफा मांग रही है. यही नहीं जनता यूरोपीय यूनियन से भी अलग होने की मांग कर रही है. प्रदर्शनकारी संप्रभुता, स्वतंत्रता और वैश्विक शासन के अंत के नारे लगा रहे हैं.