'जैश के पास सुसाइड बॉम्बरों की फौज', ऑडियो जारी कर मसूद अजहर ने दी गीदड़भभकी
पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अज़हर का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. इसमें संगठन के पास बड़ी संख्या में आत्मघाती हमलावर होने का दावा किया गया है. विशेषज्ञ इसे दबाव में दी गई भड़काऊ कोशिश मानते हैं.
नई दिल्ली: आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर से जुड़ा एक ऑडियो संदेश इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है. इस कथित संदेश में संगठन की ताकत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की कोशिश की गई है. सुरक्षा एजेंसियां ऑडियो की पृष्ठभूमि, समय और मकसद की जांच कर रही हैं. जानकारों का कहना है कि ऐसे संदेश अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए जारी किए जाते हैं.
ऑडियो संदेश में मसूद अज़हर ने अपने संगठन के पास बड़ी संख्या में आत्मघाती हमलावर होने का दावा किया है. उसने कहा कि उसके कैडर किसी निजी लाभ या सांसारिक सुविधा की अपेक्षा नहीं रखते और केवल तथाकथित शहादत की बात करते हैं. उसने यह भी संकेत दिया कि वास्तविक संख्या सामने आने पर वैश्विक स्तर पर हलचल मच सकती है. सुरक्षा एजेंसियां इन दावों को प्रचारात्मक मान रही हैं.
संदेश जारी होने का समय क्यों अहम?
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह ऑडियो ऐसे समय सामने आया है जब जैश-ए-मोहम्मद पर दबाव बढ़ा हुआ है. हाल के महीनों में संगठन से जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की खबरें आई हैं और कई सदस्यों के मारे जाने की सूचनाएं भी सामने आई हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे हालात में संगठन मनोबल बनाए रखने और डर फैलाने के लिए इस तरह के संदेश जारी करते हैं.
मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑडियो का उद्देश्य सीधे हमले की घोषणा से ज्यादा मनोवैज्ञानिक असर पैदा करना है. इस तरह के संदेश समर्थकों को सक्रिय रखने और विरोधियों में भय पैदा करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. दावों की सत्यता अक्सर जांच में कमजोर पाई जाती है. फिर भी एजेंसियां ऐसे कंटेंट को हल्के में नहीं लेतीं और हर पहलू की जांच की जाती है.
मसूद अजहर की मौजूदगी पर सवाल
गौरतलब है कि मसूद अज़हर वर्ष 2019 के बाद से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आया है. बहावलपुर में उसके ठिकाने पर हुए विस्फोट के बाद से उसके छिपे होने की बातें सामने आती रही हैं. समय-समय पर उसके नाम से ऑडियो या लिखित संदेश सामने आते रहे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल होती है. एजेंसियां स्रोत और प्रामाणिकता पर काम कर रही हैं.
सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता
सूत्रों के मुताबिक, वायरल ऑडियो को लेकर खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी निगरानी बढ़ाई गई है और किसी भी संभावित खतरे का आकलन किया जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकियों के ऐसे दावों से घबराने की बजाय ठोस खुफिया जानकारी और सतर्कता ही सबसे प्रभावी जवाब है.
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