होर्मुज के बाद अब मलक्का स्ट्रेट चर्चा में है. यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में गिना जाता है. यहां से बड़ी मात्रा में तेल और सामान गुजरता है. इस रास्ते का महत्व बहुत बड़ा है. कई देश इस पर निर्भर हैं। अब यहां नई हलचल शुरू हो गई है, जिस कारण वैश्विक चिंता बढ़ गई है। इस रास्ते पर किसी भी तरह का बदलाव पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है. व्यापारिक संतुलन बिगड़ने के साथ साथ ऊर्जा सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है.
इंडोनेशिया ने इस रूट पर शुल्क लेने की बात कही. यह प्रस्ताव अचानक सामने आया. इससे कई देशों में चिंता बढ़ी, हालांकि बाद में सरकार ने नरमी दिखाई. फिलहाल इस पर कोई फैसला नहीं हुआ, लेकिन चर्चा अब भी जारी है. यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ गया है. कई विशेषज्ञ इसे आर्थिक रणनीति मान रहे हैं. कुछ लोग इसे जोखिम भरा कदम बता रहे हैं. इससे कूटनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार इंडोनेशिया के वित्त मंत्री ने सुझाव दिया कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लिया जा सकता है। उनका तर्क था कि यह रणनीतिक मार्ग है. इससे बड़ा राजस्व मिल सकता है. इंडोनेशिया इस कमाई को साझा करने को भी तैयार था, जिस कारण ये मामला और भी चर्चा में आ गया। इस प्रस्ताव ने वैश्विक व्यापारिक जगत को चौंका दिया. कई देशों ने अब इस पर विचार करना शुरू किया. यह मुद्दा अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहा.
मलक्का स्ट्रेट करीब 900 किलोमीटर लंबा है. यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ता है. एशिया और यूरोप के बीच ये सबसे छोटा रास्ता है. हर साल लाखों जहाज यहां से गुजरते हैं. इस कारण यह वैश्विक व्यापार की रीढ़ माना जाता है. यहां कोई भी रुकावट बड़ी समस्या बन सकती है. यह मार्ग तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, जिस कारण कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं इसी पर निर्भर करती हैं. इसका महत्व आने वाले समय में और बढ़ सकता है.
सिंगापुर और मलेशिया ने इस प्रस्ताव का विरोध किया. उनका कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है. मलक्का में मुक्त आवागमन का नियम लागू है. यहां किसी तरह का टोल सही नहीं माना जाता. इस मुद्दे पर मतभेद साफ दिखे. विवाद और गहरा हो गया. दोनों देशों ने साफ संकेत दिए कि वे इसके खिलाफ हैं. यह मामला अब कूटनीतिक स्तर पर भी उठ सकता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है.
अगर टोल लागू होता तो कमाई बड़ी होने का अनुमान है. माहिरों के मुताबिक लाखों जहाज यहां से हर साल गुजरते हैं. हर जहाज से शुल्क लिया जाता. इससे हजारों करोड़ रुपये की आय हो सकती थी. हर दिन और हर घंटे करोड़ों की कमाई संभव थी. यही कारण है कि यह प्रस्ताव चर्चा में आया. यह राजस्व किसी भी देश के लिए बड़ा आकर्षण हो सकता है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़ा है. आर्थिक लाभ और राजनीतिक नुकसान दोनों का खतरा है.
विवाद बढ़ने के बाद इंडोनेशिया ने सफाई दी. सरकार ने कहा कि अभी कोई टोल लागू नहीं होगा. अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया जाएगा. फिलहाल मामला शांत करने की कोशिश की गई, लेकिन भविष्य में क्या होगा यह साफ नहीं है. दुनिया की नजर अब भी इस मुद्दे पर बनी हुई है. यह मामला फिर से उठ सकता है. परिस्थितियों के अनुसार फैसले बदले जा सकते हैं. आने वाले समय में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है।