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India Daily

'हालात बदलो नहीं तो हम सरकार बदल देंगे', नेपाल के बाद इस देश में युवा करेंगे तख्तापलट? यहां जानें विद्रोह का असली कारण

Madagascar Protest 2025: विरोध प्रदर्शन विश्वविद्यालयों और शहर के मुख्य मार्गों से शुरू हुए. बेरोजगार युवा और आर्थिक संकट से जूझ रहे नागरिक प्लेकार्ड थामकर सड़कों पर उतरे. पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियों का उपयोग किया, जिससे हिंसा और बढ़ गई.

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Edited By: Reepu Kumari
'हालात बदलो नहीं तो हम सरकार बदल देंगे', नेपाल के बाद इस देश में युवा करेंगे तख्तापलट? यहां जानें विद्रोह का असली कारण
Courtesy: Pinterest

Madagascar Protest 2025: नेपाल के बाद अब एक और देश अपने नए दौर की शुरुआत को तैयार हो रहा है. अफ्रीका के दक्षिण-पूर्वी द्वीपीय राष्ट्र मेडागास्कर के मौजूदा हालात कुछ ऐसे ही हैं. जहां के युवा अपनी बुनियादी मांग के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं. राजधानी अंतानानारिवो में पिछले हफ्ते शुरू हुए आंदोलन का मुख्य कारण बिजली और पानी की लगातार कमी रही, जिसने आम नागरिकों का जीवन प्रभावित किया.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इन प्रदर्शनों में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए. राष्ट्रपति एंड्री रजोएलिना ने टीवी पर संबोधन कर पूरी सरकार भंग करने और भविष्य में सुधार का आश्वासन देने की घोषणा की.

कर्फ्यू, लूटपाट और सड़कों पर अराजकता

ये आंदोलन केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं था. बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक संकट ने युवा आबादी को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए आंदोलन तेजी से फैल गया और नेपाल, केन्या और मोरक्को के युवा आंदोलनों से प्रेरणा लेकर युवाओं ने सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को स्पष्ट किया. राजधानी में कर्फ्यू, लूटपाट और सड़कों पर अराजकता ने इस आंदोलन को चरम पर पहुंचा दिया.

प्रदर्शन और हिंसा

विरोध प्रदर्शन विश्वविद्यालयों और शहर के मुख्य मार्गों से शुरू हुए. बेरोजगार युवा और आर्थिक संकट से जूझ रहे नागरिक प्लेकार्ड थामकर सड़कों पर उतरे. पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियों का उपयोग किया, जिससे हिंसा और बढ़ गई.

मौत और घायल होने वालों की संख्या

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 22 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए. हालांकि, मेडागास्कर सरकार ने इन आंकड़ों को खारिज किया और इसे "गलत सूचना" बताया.

बिजली-पानी की कमी और आर्थिक संकट

विद्युत कटौती और पानी की भारी कमी आंदोलन की जड़ बनी. देश की 3 करोड़ आबादी में लगभग 75% लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, जिससे असंतोष और बढ़ गया.

राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया और भविष्य की राह

राष्ट्रपति रजोएलिना ने सरकार भंग करने की घोषणा की, जनता से माफी मांगी और भविष्य में संवाद व सुधार का आश्वासन दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो यह क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकता है.