IMD Weather

साइकिल एम्बुलेंस लांच कर पाकिस्तान फिर बना हंसी का पात्र, लोग बोले- 77 साल बाद भी नहीं बदले हालात

पाकिस्तान के कराची में सिंध रेस्क्यू 1122 ने तंग गलियों और ट्रैफिक प्रभावित इलाकों के लिए साइकिल एम्बुलेंस सेवा शुरू की है. इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं.

X
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पाकिस्तान के कराची शहर में शुरू की गई साइकिल एम्बुलेंस सेवा चर्चा का विषय बन गई है. सिंध रेस्क्यू 1122 की यह पहल उन इलाकों तक प्राथमिक चिकित्सा पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जहां संकरी गलियों और भारी ट्रैफिक के कारण सामान्य एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती. इस सेवा को कुछ लोग व्यावहारिक समाधान बता रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसे लेकर सवाल भी उठा रहे हैं.

सिंध रेस्क्यू 1122 ने इस विशेष सेवा को ऐसे क्षेत्रों के लिए तैयार किया है, जहां बड़ी एम्बुलेंस का पहुंचना मुश्किल होता है. कराची के कई इलाकों में संकरी सड़कें और लंबे ट्रैफिक जाम अक्सर राहत कार्यों में देरी का कारण बनते हैं. ऐसे में साइकिल एम्बुलेंस को प्राथमिक उपचार तेजी से पहुंचाने का विकल्प माना जा रहा है.

जरूरी चिकित्सा उपकरणों से लैस

इस साइकिल एम्बुलेंस में प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी उपकरण रखे गए हैं. इसमें ऑक्सीजन मास्क, नेबुलाइजर, फर्स्ट-एड किट और अन्य आवश्यक मेडिकल सामग्री उपलब्ध है. उद्देश्य यह है कि मरीज को शुरुआती इलाज तुरंत मिल सके, जबकि जरूरत पड़ने पर बाद में उसे सामान्य एम्बुलेंस या अस्पताल तक पहुंचाया जाए.


सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस पहल के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई. कई लोगों ने इसे सीमित संसाधनों में बेहतर समाधान बताया. वहीं कुछ यूजर्स ने इसे पाकिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला कदम बताते हुए व्यंग्य किया. कई पोस्ट में इसे देश की आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाओं की चुनौती से जोड़कर देखा गया.

कम लागत वाला विकल्प

विशेषज्ञों का मानना है कि घनी आबादी और ट्रैफिक वाले शहरों में साइकिल आधारित आपात सेवा शुरुआती राहत पहुंचाने में उपयोगी हो सकती है. इसका संचालन खर्च भी सामान्य एम्बुलेंस की तुलना में कम होता है. हालांकि यह सेवा गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाने का विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है.

सेवा पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

कराची में शुरू हुई यह पहल लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं पैदा कर रही है. एक वर्ग इसे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की कोशिश मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे संसाधनों की कमी का संकेत बता रहा है. फिलहाल यह सेवा चर्चा के केंद्र में है और इसकी उपयोगिता को लेकर बहस लगातार जारी है.