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दलेर मेहंदी के तुनक-तुनक पर जापानियों ने किया ऐसा डांस, वीडियो ने सोशल मीडिया में लगा दी 'आग'

जापान के ओसाका वर्ल्ड एक्सपो में पंजाबी गायक दलेर मेहंदी के हिट सॉन्ग 'तुनक तुनक तुन' पर एक लाइव परफॉर्मेंस के दौरान जापानी दर्शकों ने जिस शालीनता और अनुशासन के साथ रिएक्ट किया, उसने सोशल मीडिया पर खूब वाहवाही बटोरी है. यह वीडियो वायरल हो चुका है और लोग इसे जापान की सभ्यता और संगीत की वैश्विक अपील का उदाहरण मान रहे हैं.

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Kuldeep Sharma

भारत मे जहां 'तुनक तुनक तुन' जैसे धांसू पंजाबी गाने बजते हैं, तो पैर थिरकने लगते हैं, लोग झूम उठते हैं और डांस फ्लोर हिला देते हैं. वही गाना अगर जापान में बजे और लोग सिर हिलाकर और धीमे-धीमे तालियां बजाकर अपनी खुशी जताएं, तो नज़ारा कैसा होगा? जी हां, कुछ ऐसा ही हुआ जापान के ओसाका वर्ल्ड एक्सपो में, जहां भारतीय गायन और नृत्य का रंग तो बिखरा, मगर जापानी अंदाज़ में- शांत, अनुशासित और बेहद सुसंस्कृत.

दलेर मेहंदी का ‘तुनक तुनक तुन’ गाना भारतीय पॉप संस्कृति का प्रतीक बन चुका है. जहां भारत में इस गाने पर स्टेज तो क्या, सड़क भी डांस फ्लोर बन जाती है, वहीं जापान में इसका एक अलग ही रंग देखने को मिला. वायरल वीडियो में देखा गया कि जब पंजाबी सिंगर और डांसर्स मंच पर परफॉर्म कर रहे थे, तब दर्शकों ने न तो शोर मचाया और न ही उठकर नाचे. उन्होंने सिर हिलाकर और सौम्य तालियों और एकदम शांतिपूर्ण और अनुशासित अंदाज़ में अपनी प्रतिक्रिया दी. 

सोशल मीडिया पर जापानी शिष्टाचार की तारीफ

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर X यूज़र Jahazi ने शेयर किया और लिखा, 'Japanese log Punjabi songs pe bhi itne civilised way mein vibe karte hain.' इस एक लाइन में जो बात छिपी है, उसी ने इंटरनेट का दिल जीत लिया. एक यूज़र ने लिखा, 'Most civilised country for a reason.' कई लोगों ने इसे जापानी संस्कृति की एक अद्भुत मिसाल बताया, जहां उत्साह भी शालीनता में ढला होता है. वहीं कुछ यूज़र्स ने इसे ग्लोबल म्यूज़िक कनेक्शन की एक खूबसूरत तस्वीर कहा.

म्यूजिक की कोई भाषा नहीं होती

यह वीडियो इस बात का सबूत है कि संगीत की कोई सीमाएं नहीं होतीं. चाहे भाषा समझ में आए या न आए, भावनाएं और रिद्म सबको जोड़ देती हैं. ‘तुनक तुनक तुन’ का बीट ही कुछ ऐसा है जो ऊर्जा से भर देता है. जापान जैसे देश में इस गाने को इतना सम्मान और सभ्यता के साथ सुना और सराहा जाना, इस बात का संकेत है कि भारतीय संगीत ने विश्व मंच पर अपनी जगह बना ली है. और यह भी कि सांस्कृतिक अंतर होते हुए भी, संगीत हमें एक कर देता है.