नई दिल्ली: जापान की पहाड़ियों और जंगलों में रहने वाले भालू अब लगातार इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं. बीते साल हमलों ने नया रिकॉर्ड बनाया और सरकार को बड़े पैमाने पर भालुओं को पकड़ने की कार्रवाई करनी पड़ी. पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025 में भालुओं के हमलों से 13 लोगों की मौत हुई और 238 लोग प्रभावित हुए. इसी दौरान 14,720 भालू पकड़े गए.
भालुओं के गांवों की ओर आने के पीछे जंगलों में भोजन की कमी अहम कारण मानी जा रही है. एकॉर्न और बीच नट्स जैसे प्राकृतिक खाद्य स्रोतों की कमजोर पैदावार ने उनकी परेशानी बढ़ाई. ग्रामीण इलाकों में आबादी घटने से खाली खेत और बगीचे भी बढ़े हैं, जिससे जंगल और बस्तियों की सीमा धुंधली हुई है. ऐसे में भोजन की तलाश में भालुओं का इंसानी इलाकों तक पहुंचना आसान हो गया.
वित्तीय वर्ष 2025 में जापान में भालुओं के हमलों से 238 लोग प्रभावित हुए, जिनमें 13 की मौत हुई. यह देश में अब तक का सबसे गंभीर साल रहा. उत्तरी और पूर्वोत्तर इलाकों, खासकर अकिता और इवाते, में समस्या ज्यादा दिखाई दी. इसी अवधि में एशियाई काले भालुओं के दिखने की 50,776 घटनाएं दर्ज हुईं, जो उपलब्ध रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा हैं.
भालुओं के बढ़ते हमलों से निपटने के लिए जापान ने पकड़ने और मारने की कार्रवाई तेज की. 2025-26 में कुल 14,720 भालू पकड़े गए, जो एक साल पहले की तुलना में करीब तीन गुना थे. हालांकि संरक्षण विशेषज्ञों का सवाल है कि इतनी बड़ी संख्या में भालुओं को मारने से क्या इंसानों की सुरक्षा की समस्या स्थायी रूप से हल होगी.
जापान में एशियाई काला भालू खास चिंता का विषय है. सरकार अब भालुओं की संख्या और उनके इलाकों को बेहतर तरीके से समझने के लिए व्यापक सर्वे कर रही है. पर्यावरण मंत्रालय ने अलग-अलग क्षेत्रों में कैमरों की मदद से आबादी और गतिविधियों का अध्ययन शुरू किया है. इसका उद्देश्य भविष्य की नीति को अधिक वैज्ञानिक बनाना है.
विशेषज्ञों के मुताबिक इंसानों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके लिए केवल बड़े पैमाने पर शिकार पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता. कचरा सुरक्षित रखना, घरों के आसपास भोजन के स्रोत नियंत्रित करना, बाड़ लगाना और आबादी वाले इलाकों से भालुओं को दूर रखना जैसे उपाय भी महत्वपूर्ण हैं. जापान के सामने अब ऐसी नीति बनाने की चुनौती है, जिसमें इंसानी सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों का संतुलन बना रहे.