Nepal Floods: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार को आई भीषण बाढ़ में ईशा फाउंडेशन के 80 सदस्यों के लापता होने की खबर से पूरे शिविर में मातम छा गया है. तिब्बत के सागा में मौजूद सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने जब यह जानकारी दी तो उनकी आवाज कांप उठी. आंखों में आंसू रोकने की कोशिश करते हुए उनके हाथ कांप रहे थे.
ईशा फाउंडेशन के शिविर में उदासी का माहौल है. सद्गुरु के अनुयायी रो रहे हैं. आमतौर पर शांत रहने वाले सद्गुरु इस बार बहुत विचलित दिखे. उन्होंने भारतीय और चीनी दूतावासों से अपील की है कि उन्हें ग्यिरोंग जाने की अनुमति दी जाए, जहां बाढ़ से भारी तबाही हुई है. वहां वे बचाव कार्य और लापता तीर्थयात्रियों के अवशेष खोजने में मदद करना चाहते हैं.
— Sadhguru (@SadhguruJV) August 27, 2026
सद्गुरु ने बताया कि यह 80 सदस्यों का दल कैलाश यात्रा से लौट रहा था. ग्यिरोंग के इमिग्रेशन सेंटर पर पहुंचते ही इमारत कुछ ही सेकंड में बाढ़ के पानी में बह गई. उन्होंने कहा- 'विनाश का पैमाना देखकर लगता है कि स्थिति बहुत खराब है. यह एक भयानक और असाधारण घटना है.'
नेपाल के विदेशी मंत्री के अनुसार इस बाढ़ में करीब 300 लोगों की मौत हो चुकी है और 1500 से ज्यादा लापता हैं. इनमें लगभग 300 भारतीय भी शामिल हैं. बाढ़ ने घरों, वाहनों और पुलों को बहा दिया है. पूरे इलाके में संचार व्यवस्था ठप हो गई है. सद्गुरु ने बताया कि गुरुवार सुबह वे खुद प्रभावित इलाके में जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सभी रास्ते बंद हो गए. उन्होंने कहा- 'अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है. लेकिन तबाही का स्तर देखकर उम्मीद कम ही लगती है.'
समूह के नेता इशंगा प्रवीण ने सुबह 9:05 बजे संदेश भेजा था कि वे इमिग्रेशन सेंटर पहुंच गए हैं. सिर्फ नौ मिनट बाद 9:14 बजे यह हादसा हो गया. सद्गुरु ने याद दिलाया कि ठीक एक हफ्ते पहले वे खुद उसी इमिग्रेशन बिल्डिंग में थे, जो अब पूरी तरह बह चुकी है.