अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव चरम पर है. दोनों देश पहले से भी ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे हैं. अमेरिका की ओर से ईरान के अलग-अलग शहरों पर आग के गोले बरसाए जा रहे हैं, वहीं ईरान अमेरिका पर सीधा हमला किए बिना ही भारी नुकसान पहुंचा रहा है.
ईरान ने अपनी ताकत और अमेरिका की कमजोरी को बेहतर तरीके से भांप लिया और अब उसका फायदा भी उठा रहा है. ईरान ने बिना कोई परमाणु हमला किए अमेरिका को तो प्रभावित किया ही, साथ में पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खिंचा है. ईरान ने होर्मुज को अपनी ताकत बनाकर अमेरिका को अपनी शर्त मनवाने पर मजबूर कर दिया.
इजरायल और अमेरिका ने जब मिलकर ईरान पर हमला किया था, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अगर वे चाहें तो ईरान को नेस्तनाबूद कर देंगे. हालांकि इस जंग के लगभग पांच महीने पूरे होने के बाद भी ऐसा कुछ होता नजर नहीं आ रहा है. उलटा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही देश में एक कमजोर राष्ट्रपति के रूप में नजर आने लगे हैं.
अभी अमेरिका में मिड टर्म चुनाव होना है, उससे पहले ट्रंप ने अपने देश की जनता को यह भरोसा दिलाया था कि वह जल्द ही होर्मुज पर सब नियंत्रित कर लेंगे. इसके लिए उन्होंने ईरान के साथ समझौता करने की भी कोशिश की, लेकिन तेहरान ने इस बार साफ कर दिया कि अब समझौता अपनी शर्तों पर होगा. एमओयू साइन होने के कुछ ही दिनों बाद दोनों देशों ने एक बार फिर से एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए और होर्मुज फिर से बंद हो गया. मिड टर्म चुनाव से पहले होर्मुज का बंद हो जाना, डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने मिड टर्म चुनाव से पहले ईरान से समझौता करके अमेरिकी जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की थी, उनके प्रतिनिधित्व में अमेरिका की कूटनीति मजबूत हुई है. लेकिन जब एक बार फिर से होर्मुज बंद हो गया तो इसे एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है. ईरान ने अमेरिका की कमजोरी को भांप लिया है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने के लिए उसके सबसे कमजोर हिस्से यानी तेल सप्लाई को अपना नया निशाना बनाया है.
एक बार फिर से तनाव बढ़ने के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जो ट्रंप के लिए महंगा साबित हो सकता है. पेट्रोल और डीजल महंगा होने के कारण अमेरिका की आम जनता से लेकर बड़े-बड़े व्यापारियों पर असर पड़ रहा है. जिसे ट्रंप की विफलता के रूप में देखा जा रहा है. अगर ईरान होर्मुज में अपनी पकड़ को ऐसे ही मजबूत रखता है तो ट्रंप के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है. नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव पर इसका सीधा असर पड़ेगा.