US Israel Iran War

शांति वार्ता से पहले इस्लामाबाद में लॉकडाउन जैसे हालात, चप्पे-चप्पे पर जवान तैनात; स्कूल-दफ्तरों में लगा ताला

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली ऐतिहासिक शांति वार्ता के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. राजधानी को किले में तब्दील कर 10,000 जवान तैनात किए गए हैं. यह बैठक वैश्विक स्थिरता के लिए निर्णायक होगी.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पड़ोसी देश पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस समय दुनिया की कूटनीति का केंद्र बनी हुई है. शनिवार को होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले पूरे शहर में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है. शनिवार और रविवार को स्कूलों और दफ्तरों में सार्वजनिक अवकाश रहेगा, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो. इस वार्ता का उद्देश्य पश्चिम एशिया में छह हफ्तों से जारी उस भीषण युद्ध को रोकना है, जिसने न केवल हजारों जानें ली हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी हिला कर रख दिया है.

सुरक्षा के मद्देनजर इस्लामाबाद पुलिस ने शहर के प्रवेश और निकास द्वारों पर विशेष चौकियां बनाई हैं. 'सेरेना होटल' जहां दोनों प्रतिनिधिमंडल रुकेंगे, उसे पूरी तरह सील कर दिया गया है. पाकिस्तान को डर है कि इजरायल जैसे बाहरी तत्व इस कूटनीतिक प्रयास को विफल करने की कोशिश कर सकते हैं. इसलिए गृह मंत्रालय में एक विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जो हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर बारीकी से नजर रख रहा है. पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमान भी आसमान से सुरक्षा कवच प्रदान कर रहे हैं.

शांति वार्ता का मुख्य एजेंडा 

इस बातचीत का प्राथमिक लक्ष्य एक स्थायी युद्धविराम की नींव रखना है. दोनों पक्ष लेबनान को इस समझौते में शामिल करने और तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग 'होर्मुज' को फिर से खोलने पर चर्चा करेंगे. लेबनान में हालिया हमलों में 300 से अधिक लोगों की मौत ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिससे यह वार्ता और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है. ऊर्जा बाजारों की स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए इस समुद्री मार्ग का बहाल होना बेहद जरूरी है.

ईरान और अमेरिका के प्रस्ताव 

ईरान ने शांति के लिए एक 10-सूत्रीय योजना पेश की है, जिसमें परमाणु संवर्धन के अधिकारों और क्षेत्रीय प्रभाव की मान्यता की मांग की गई है. इसके जवाब में अमेरिका ने 15-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव रखा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की जिद छोड़े और होर्मुज स्ट्रेट को बिना शर्त खोला जाए. इन दोनों विरोधाभासी प्रस्तावों के बीच बीच का रास्ता निकालना ही इस बैठक की सबसे बड़ी परीक्षा होगी. व्हाइट हाउस के अधिकारी इसे एक कठिन लेकिन जरूरी प्रक्रिया मान रहे हैं.

विमानन क्षेत्र पर संकट का साया 

ईरान संकट के कारण वैश्विक विमानन क्षेत्र पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुका है. दुबई ने विदेशी एयरलाइंस के लिए उड़ानों की संख्या सीमित कर दी है. जिससे भारतीय विमानन कंपनियों को लगभग 2,500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ानों को लंबे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की लागत बढ़ गई है. यदि इस्लामाबाद वार्ता सफल होती है, तो यह एयरलाइंस और यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी.