नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान के बीच तनाव अब थमने का नाम नहीं ले रहा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से बुधवार को ईरान को हमले की धमकी दी. जिसमें उन्होंने कहा कि अगर परमाणु हथियारों पर समझौता नहीं किया जाता है तो उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है.
ट्रंप का यह पूरा खेल ईरानी छात्रों के प्रदर्शन के बीच शुरू हुआ. एक ओर जहां ईरान में बढ़ती महंगाई के खिलाफ छात्र सड़क पर उतरे थे, तभी उनके करीबी बनकर ट्रंप खामेनेई सरकार पर दवाब बनाना शुरू कर दिया. जिसके बाद अब यह मामला बढ़ता ही जा रहा है.
तेहरान की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के वार्ता ऑफर को अस्वीकार कर दिया गया. जिसके बाद अमेरिकी नेता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए एक नई धमकी दे डाली. हालांकि ईरान की ओर से इसपर अभी कोई भी प्रतिक्रिया जारी नहीं किया गया है.
अमेरिकी नेता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि उम्मीद है कि ईरान जल्द ही बातचीत के लिए तैयार होगा और एक निष्पक्ष (परमाणु हथियारों के बिना) और न्यायसंगत समझौता करेगा. हालांकि इसी के साथ उन्होंने धमकी भी मैनें ईरान से पहले भी कहा था कि समझौता करो. लेकिन उन्होंने नहीं किया और फिर इसका अंजाम 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' हुआ. इस ऑपरेशन से ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा. उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि अब अगला हमला इससे कहीं ज्यादा भयानक होगा!
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगातार ईरान को धमकी दी जा रही है. ऐसा लग रहा है कि किसी भी वक्त ईरान और अमेरिका के बीच आर-पार की लड़ाई हो सकती है. ईरान में छात्रों के प्रदर्शन से शुरू हुआ मामला अब परमाणु हथियार तक पहुंच चुका है. या फिर यह कहा जाए कि ईरान के युवाओं का प्रदर्शन ट्रंप के लिए खामेनेई सरकार से दो टूक के लिए केवल एक पुल का काम कर रहा था. ट्रंप ने खामेनेई सरकार को छात्रों के खिलाफ एक्शन ना लेने की हिदायत दी थी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अगर उनपर हमले हुए तो अमेरिका, ईरान को इसका हिसाब देना पड़ेगा. अमेरिका के इस प्लानिंग में मिडिल ईस्ट उसके साथ नहीं है. यूईए के बाद सऊदी ने भी ट्रंप का साथ देने से मना कर दिया.