नई दिल्ली: ईरान में बढ़ती महंगाई और गिरती मुद्रा के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोगों के बीच अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की गूंज सुनाई देने लगी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने हालात और संवेदनशील बना दिए हैं. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा. इसके जवाब में ईरानी नेतृत्व ने तीखी चेतावनी जारी की है और इसे अपनी संप्रभुता पर सीधी चुनौती बताया है.
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार अली शामखानी ने अमेरिका को साफ संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान की सुरक्षा एक रेड लाइन है. किसी भी बहाने से सुरक्षा के करीब आई बाहरी ताकत को ऐसा जवाब मिलेगा जिसे वह कभी नहीं भूलेगी. शामखानी ने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया और अमेरिकी इरादों पर सीधा सवाल उठाया.
शामखानी ने अपने बयान में अमेरिका के पुराने हस्तक्षेपों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ईरानी जनता अमेरिका के तथाकथित रेस्क्यू मिशन को अच्छी तरह समझती है. उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और गाजा का उदाहरण देते हुए कहा कि इन जगहों पर अमेरिकी दखल ने शांति नहीं बल्कि तबाही लाई. उनका कहना था कि ईरान किसी भी कीमत पर वैसा अनुभव दोहराने नहीं देगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ईरान को चेतावनी दी थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका लॉक्ड एंड लोडेड है और जरूरत पड़ी तो मदद के लिए आगे आएगा. यह बयान ऐसे समय आया जब ईरान में लगातार छठे दिन प्रदर्शन चल रहे थे और हालात तनावपूर्ण बने हुए थे.
ईरान में विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से आर्थिक परेशानियों के कारण शुरू हुए हैं. बढ़ती कीमतें, बेरोजगारी और रियाल की तेज गिरावट ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है. कई इलाकों में सरकार और व्यवस्था के खिलाफ नारे भी सुनाई दिए हैं. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक हिंसा से जुड़े मामलों में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है.
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने अमेरिका और इजरायल पर अशांति भड़काने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि परदे के पीछे जो चल रहा था वह अब साफ हो गया है. लारीजानी ने चेतावनी दी कि अमेरिकी हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और खुद अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाएगा. उन्होंने अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए.
ईरान में मौजूदा प्रदर्शन 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं. तब महसा अमीनी की मौत के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था. अब एक बार फिर हालात गंभीर होते दिख रहे हैं और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरे पश्चिम एशिया के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है.