नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में स्विट्जरलैंड में हुई महत्वपूर्ण वार्ता के बाद ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब कभी पहले जैसा नहीं रहेगा. युद्ध से पहले जो जहाजों की आवाजाही यहां होती थी, अब वैसी नहीं हो पाएगी. गलिबाफ ने साफ कहा कि होर्मुज का प्रबंधन पूरी तरह ईरानी प्रशासन के हाथ में रहेगा. ईरान अमेरिका पर भरोसा नहीं करता और भविष्य में भी नहीं करेगा.
वार्ता के बाद गलिबाफ ने बताया कि दोनों देशों के बीच एक टेलीफोनिक हॉटलाइन बनाने का फैसला हुआ है. इस हॉटलाइन के जरिए अमेरिका या कोई भी देश जहाजों की आवाजाही को लेकर अपनी कोई आपत्ति या चिंता जता सकता है. इससे गलतफहमी दूर होगी और समुद्री यातायात सुरक्षित रहेगा.
ईरान ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए काम करेगा. अगर लेबनान या किसी और जगह पर तनाव बढ़ा तो होर्मुज में भी समस्या खड़ी हो सकती है. इसलिए यह हॉटलाइन बहुत जरूरी है.
वार्ता में लेबनान में चल रहे संघर्ष को रोकने पर भी बात हुई. दोनों पक्ष लेबनान सरकार के साथ मिलकर एक प्रकोष्ठ बनाने पर सहमत हुए हैं. यह प्रकोष्ठ लेबनान में लड़ाई रोकने और शांति बनाए रखने पर नजर रखेगा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस प्रगति का स्वागत किया, लेकिन कहा कि यह ईरान-अमेरिका समझौते की पहली बड़ी परीक्षा होगी.
वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी विस्तार से चर्चा हुई. दोनों पक्ष भविष्य में व्यापक परमाणु समझौते की दिशा में काम करने पर सहमत हुए. तकनीकी स्तर की बातचीत जल्द शुरू होगी. पहला दौर की बातचीत लगभग 18 घंटे चली. ईरानी प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड से वापस लौट आया है. अगले दौर की बैठक की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि इस सप्ताह ही बातचीत जारी रहेगी.
यह वार्ता इसलिए खास है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. यहां से दुनिया का बहुत बड़ा तेल निर्यात होता है. अगर यहां कोई समस्या हुई तो पूरी दुनिया के तेल के भाव प्रभावित हो सकते हैं. ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लंबे समय से चल रहा है. इस वार्ता से उम्मीद जगी है कि दोनों देश कुछ मुद्दों पर समझौता कर सकते हैं. हालांकि दोनों पक्ष अभी भी एक-दूसरे पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहे हैं.