नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरानी तेल के उत्पादन, आपूर्ति और बिक्री को सीमित अवधि के लिए अनुमति देने वाला विशेष लाइसेंस जारी किया है. इस कदम को दोनों देशों के बीच जारी संवाद की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने के साथ-साथ क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों को भी बल मिल सकता है.
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड में जारी बातचीत के दौरान कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति हुई है. उनके अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों के प्रवेश को लेकर सहयोग का संकेत दिया है.
ट्रेजरी विभाग की ओर से जारी अस्थायी जनरल लाइसेंस 21 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा. इसके तहत ईरानी मूल के कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोलियम वस्तुओं के उत्पादन, बिक्री, आपूर्ति और अनलोडिंग से जुड़े आवश्यक लेन-देन की अनुमति दी गई है. इससे कई देशों को मौजूदा कारोबारी गतिविधियां जारी रखने में सुविधा मिल सकती है.
इस निर्णय का सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो ईरानी तेल और ऊर्जा उत्पादों का आयात करते हैं, जिसमें भारत भी शामिल है. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद लाइसेंस की अवधि तक ऐसे लेन-देन जारी रखे जा सकेंगे. इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव कम होने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी बातचीत को सकारात्मक बताया है. उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों के साथ हुई लंबी चर्चा ने अंतिम समझौते के लिए मजबूत आधार तैयार किया है. दोनों पक्ष ऐसे समाधान की तलाश में हैं जो लंबे समय से चले आ रहे तनाव और टकराव को समाप्त कर सके.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी लाइसेंस केवल आर्थिक निर्णय नहीं बल्कि एक कूटनीतिक संकेत भी है. आने वाले सप्ताहों में वार्ता किस दिशा में बढ़ती है, इस पर ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों की नजरें टिकी रहेंगी. फिलहाल इस कदम ने ईरान से जुड़े वैश्विक व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में नई उम्मीदें पैदा कर दी हैं.