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तेहरान में खूनी झड़प, खामेनेई के मुख्यालय पर हमले की कोशिश नाकाम, ईरानी सेना का दावा- '100 लड़ाकों को किया ढेर'

तेहरान के अति-सुरक्षित मोताहारी कॉम्प्लेक्स के पास ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और विपक्षी संगठन मुजाहिद्दीन-ए-खल्क (MEK) के बीच खूनी भिड़ंत हुई है. इस संघर्ष में 100 से अधिक विद्रोहियों के मारे जाने की खबर है, जिसने समूचे मध्य-पूर्व में सनसनी फैला दी है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: ईरान की राजधानी तेहरान मंगलवार को उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गई जब विपक्षी संगठन मुजाहिद्दीन-ए-खल्क (MEK) के लड़ाकों ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मुख्यालय के पास एक बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देने की कोशिश की. इस दुस्साहस का जवाब देते हुए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भीषण जवाबी कार्रवाई की. IRGC का दावा है कि उन्होंने इस मुठभेड़ में MEK के कम से कम 100 लड़ाकों को मार गिराया है. ईरान की सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी और हिज्बुल्लाह समर्थित अल-अखबार ने भी इस संघर्ष और हताहतों की भारी संख्या की पुष्टि की है.

यह भीषण लड़ाई तेहरान स्थित मोताहारी कॉम्प्लेक्स के पास हुई, जो ईरान का सबसे सुरक्षित और संवेदनशील सरकारी परिसर माना जाता है. यह परिसर न केवल सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का मुख्यालय है, बल्कि यहाँ गार्डियन काउंसिल, इंटेलिजेंस मिनिस्टर का ऑफिस और खामेनेई के बेटे मोजतबा का घर भी स्थित है. MEK के मुताबिक, सोमवार सुबह की नमाज के समय शुरू हुई इस भिड़ंत के बाद पूरे दिन कंपाउंड में एम्बुलेंसों की भारी आवाजाही देखी गई. जहां सरकार इसे एक विफल आतंकी हमला करार दे रही है, वहीं MEK इसे अपना एक 'कामयाब ऑपरेशन' बता रहा है.

विदेशी खुफिया एजेंसियों के समर्थन का आरोप 

लेबनानी न्यूज आउटलेट अल-अखबार ने इस ऑपरेशन को MEK द्वारा अब तक का सबसे 'खतरनाक और जटिल' हमला बताया है. रिपोर्ट में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि इस घुसपैठ को सीधे तौर पर विदेशी खुफिया एजेंसियों का समर्थन प्राप्त था. हालांकि, ईरानी सुरक्षा बलों ने शुरुआती चरण में ही इस साज़िश को नाकाम करने का दावा किया है. सरकारी मीडिया ने यह भी टिप्पणी की है कि MEK इस बात को नजरअंदाज कर रहा है कि अंतरराष्ट्रीय शक्तियों द्वारा उनका इस्तेमाल केवल रणनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है.

मानवाधिकार संगठनों और UN तक पहुंचा मामला 

मुजाहिद्दीन-ए-खल्क ने एक बयान जारी कर कहा है कि उनके 150 से अधिक विद्रोही सुरक्षित बेस पर लौट आए हैं, लेकिन उनके 100 साथी 'शहीद' हो गए या हिरासत में ले लिए गए. संगठन ने अब तक हिरासत में लिए गए 16 सदस्यों के नाम संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष रिपोर्टर के साथ साझा किए हैं. साथ ही, मारे गए लड़ाकों की सूची अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को सौंपने की तैयारी की जा रही है. गौरतलब है कि अली खामेनेई की सरकार MEK को एक 'टेरर ग्रुप' मानती है, जिसे पहलवी वंश के अंतिम दौर में ही प्रतिबंधित कर दिया गया था.