ईरान के साथ चल रहे जंग के बीच अमेरिका के लड़ाकू विमान F-15E के दो पायलट दुश्मन देश के पहाड़ी इलाके में गिर गए थे. जिन्हें बचाने के लिए अमेरिका द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा कि दोनों पायलट को सुरक्षित रुप से बाहर निकाल लिया गया. हालांकि अब ईरान ने इस ऑपरेशन के पीछे की एक नई कहानी बताई है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर पायलट को बचाने के नाम पर एनरिच्ड यूरेनियम चुराने की साजिश रचने का आरोप लगाया है. ईरानी अधिकारियों ने यह दावा किया कि वाशिंगटन ने इस घटना को अपनी सैन्य कार्रवाई की आड़ बनाया, लेकिन ईरान ने इसे पूरी तरह विफल कर दिया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अमेरिका ने F-15E लड़ाकू विमान के पायलट को बचाने के बहाने ईरानी क्षेत्र में सैन्य अभियान चलाया. उन्होंने अमेरिका के इस ऑपरेशन के बारे में विशेष जानकारी देते हुए कहा कि कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत में पायलट के होने का दावा किया गया था, जबकि अमेरिकी बल द्वारा मध्य ईरान में उतरने की कोशिश की जा रही थी.
बगाई ने जोर देकर कहा कि इस घटना को एनरिच्ड यूरेनियम चोरी करने की धोखाधड़ी भरी योजना के रूप में देखा जाना चाहिए. उन्होंने आगे बताया कि ईरानी सुरक्षा बलों ने अमेरिकी ऑपरेशन को सफलतापूर्वक रोक दिया और यह अमेरिका के लिए एक बड़ी असफलता साबित हुआ.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दो अमेरिकी सैनिकों को बचाने के लिए उन्होंने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दी थी. इन सैनिकों का F-15E विमान ईरानी क्षेत्र में मिसाइल हमले में गिरा था. ट्रंप ने उन सैनिकों को वापस लाने की कसम खाते हुए कहा था कि अमेरिकी सेना में हम किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ते. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बचाव अभियान में 155 विमानों की विशाल तैनाती की गई थी. ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि विरोधी बलों को भ्रमित करने के लिए धोखे के कई तरीके अपनाए गए, क्योंकि हजारों ईरानी सैनिक सक्रिय रूप से उनकी तलाश में थे.