'हमें क्या करना है, यह तय करने का किसी को अधिकार नहीं', यूरेनियम पर ईरान की अमेरिका को दो टूक

ईरान ने अमेरिका के दबाव को खारिज करते हुए साफ किया है कि वह यूरेनियम संवर्धन नहीं छोड़ेगा. तेहरान ने बातचीत जारी रखने की शर्त आपसी सम्मान और प्रतिबंधों में राहत को बताया है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच वर्षों बाद फिर शुरू हुई परमाणु वार्ता के बीच तेहरान ने सख्त रुख अपनाया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश किसी भी दबाव या सैन्य धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है. ओमान में चल रही बातचीत से ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की उम्मीद है, जबकि अमेरिका उसके परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं चाहता है.

यूरेनियम संवर्धन पर अडिग ईरान

तेहरान में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि यूरेनियम संवर्धन ईरान के लिए नॉन निगोशिएबल मुद्दा है. उन्होंने कहा कि चाहे युद्ध की स्थिति क्यों न आ जाए, ईरान अपनी नीति नहीं बदलेगा. उनके अनुसार, किसी भी देश को ईरान के व्यवहार को तय करने का अधिकार नहीं है. अराघची ने जोर दिया कि यह मुद्दा राष्ट्रीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता से जुड़ा है.

बातचीत के साथ अविश्वास की छाया

ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में दोबारा शुरू हुई बातचीत को लेकर अराघची ने सावधानी बरतने की बात कही. उन्होंने कहा कि तेहरान कुछ भरोसा बढ़ाने वाले कदमों पर विचार कर सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब आपसी सम्मान हो. लगातार लगे प्रतिबंध और सैन्य गतिविधियां अमेरिका की मंशा पर सवाल खड़े करती हैं, जिससे ईरान में अविश्वास बना हुआ है.

अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और सख्त संदेश

अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत दिखाते हुए विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन तैनात किया है. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे सुरक्षा और 'शांति के लिए ताकत' की नीति बताया. हालांकि, अराघची ने कहा कि इस तरह की सैन्य तैनाती ईरान को डराने में नाकाम रहेगी. उनके अनुसार, दबाव की राजनीति से समाधान नहीं निकल सकता.

घरेलू हालात और बढ़ता तनाव

यह कूटनीतिक खींचतान ऐसे समय हो रही है जब ईरान के भीतर भी हालात तनावपूर्ण हैं. आर्थिक मुश्किलों को लेकर हुए प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों के दावे सामने आए हैं. सरकार और मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों में बड़ा अंतर है. इन हालातों के बीच ईरान ने साफ किया है कि वह अमेरिकी रवैये के आधार पर आगे की बातचीत पर फैसला करेगा.