IND Vs NZ

'तेहरान को नए नेता की जरूरत', ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का खुला बयान

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव धीरे-धीरे और भी ज्यादा बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई का विरोध किया है और उन्हें पद से हटाने की मांग की है.

X (@Osint613)
Shanu Sharma

नई दिल्ली: ईरान में कुछ दिनों से तनाव का माहौल है. लोग बढ़ती महंगाई पर खामेनेई सरकार का विरोध कर रहे हैं. हालांकि इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का खुला साथ दिया. लेकिन अब उन्होंने खुले तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के दशकों पुराने शासन को खत्म करने की मांग की है. 

डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर कहा कि ईरान की अस्थिरता को देखते हुए लोगों को दशकों पुराने शासन मिलना चाहिए. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान की वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक माहौल को और गर्म हो गया है.

पहली बार ट्रंप का खुला बयान

डोनाल्डड ट्रंप ने पॉलिटिको को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अब ईरान में नए नेतृत्व की तलाश की जानी चाहिए. हालांकि इससे पहले खामेनेई ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान में फैली अशांति के पीछे अमेरिका और खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया था.

डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ईरान में परिवर्तन चाहते हैं लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब ट्रंप ने इतनी स्पष्टता के साथ ईरान में शासन परिवर्तन की बात कही है. इससे पहले उनके बयान कड़े जरूर थे, लेकिन इस तरह की सीधी मांग कम ही देखने को मिली थी. ईरान में बीते हफ्तों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे. 

खामेनेई का ट्रंप के खिलाफ सीधा हमला

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें ईरान में खून-खराबे और अस्थिरता का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी राष्ट्र पर जानमाल का नुकसान और बदनामी थोपी है.
एक अन्य बयान में खामेनेई ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल से जुड़े समूहों ने ईरान में हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. उन्होंने इसे ईरान के खिलाफ गंभीर बदनामी और अपराध करार दिया. ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर डर और हिंसा के जरिए शासन करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक नेता का काम देश को संभालना होता है, न कि सत्ता में बने रहने के लिए हजारों लोगों की जान लेना. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयानों से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है.