ईरान का सबसे दर्दनाक ‘नौरोज 2026’, बच्चियों की कब्र देख आज भी रो पड़ी माएं

नौरोज यानी फारसी न्यू ईयर है. यह दिन ईरान के लोगों के लिए सिर्फ दुख लाया है. 28 फरवरी को शजरेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले ने यहां के लोगों को सबकुछ तबाह कर दिया.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: आज फारसी न्यू ईयर यानी नौरोज है, जिसे ईरान में भी धूमधाम से बनाया जाता था. यह दिन खुशियों, नई शुरुआत और बसंत के आने का बहुत बड़ा प्रतीक माना जाता है. इस दौरान घर में एक खास टेबल सजाई जाती है, जिसे हफ्त-सीन कहा जाता है. इसमें सात चीजें होती हैं जो फारसी में 'स' से शुरू होती हैं, जैसे हरी सब्जियां (सब्जी), सेब, सिक्के, सिरका, लहसुन वगैरह. ये सब अच्छी किस्मत और खुशी लाने के लिए रखे जाते हैं. इस दिन घर के बच्चे, बड़े सभी लोग मिलकर जश्न मनाते हैं. 

हालांकि, इस बार, मार्च 2026 का नौरोज ईरान के लिए बहुत दुखद समय बनकर आया है. ये इतिहास में एक गहरा घाव बनकर रह गया है. आज जहां पर पटाखों की आवाज होनी चाहिए थी वहां केवल दुख और खामोशी है. मां-बाप इस दिन का जश्न मनाने के बजाय अपने बच्चों की कब्र पर फूल चढ़ाते नजर आ रहे हैं. 

आखिर क्या है इस खामोशी की वजह:

ईरान के दक्षिण में मीनाब शहर में एक प्राइमरी गर्ल्स स्कूल था जिसका नाम शजरेह तैयबेह है. 28 फरवरी 2026 की सुबह जब बच्चे स्कूल में मौजूद थे तभी अमेरिका और इजरायल की तरफ से जो हमले शुरू किए गए थे उसमें एक मिसाइल स्कूल पर गिर गई थी. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों से हुआ था. मिसाइल गिरते ही पूरी इमारत मलबे में बदल गई. ईरानी मीडिया और अधिकारियों के अनुसार, 168 से 175 तक बच्चे और कुछ टीचर-स्टाफ मारे गए. इसमें ज्यादातर 7 से 12 साल तक की छोटी लड़कियां थीं. 

अमेरिका ने इस हमले को लेकर अपना स्पष्टिकरण दिया था कि उसने यह मिसाइल जानबूझकर नहीं मारी थी, बल्कि वो वहां पास में मौजूद IRGC (ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स) की नेवल बेस पर हमला कर रहे थे, लेकिन गलती से यह स्कूल पर जा गिरी. इस हमले को यूनिसेफ, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, यूनेस्को जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने बेहद ही गंभीर बताया था. इन सभी का कहना था कि ये बच्चों पर हमला है, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है. 

अब तक 1400 से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान:

देखा जाए तो यह केवल एक स्कूल की बात नहीं है. जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक 1400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 17000 से ज्यादा लोग घायल हैं. कई लोगों को अपने घर को छोड़कर जाना पड़ा. मीनाब स्कूल का हमला ये साबित करता है कि युद्ध में सबसे ज्यादा कीमत मासूम बच्चे चुकाते हैं. इस बार का नौरोज दुनिया को याद दिलाता है कि युद्ध कितना क्रूर होता है.