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होर्मुज में US नेवी की नींद उड़ाने वाली घातक 'मॉस्किटो फ्लीट' क्या है? ईरान की इस चाल से पस्त हुआ अमेरिका!

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने के बीच ईरान की मॉस्किटो फ्लीट अमेरिकी नौसेना के लिए चुनौती बनी हुई है. छोटे तेज हमलावर जहाज और गुप्त ठिकाने इस रणनीति की ताकत हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है. अमेरिका की बढ़ती समुद्री मौजूदगी और हालिया हमलों के बाद ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए छोटी लेकिन घातक नौकाओं पर भरोसा बढ़ा दिया है. बड़े युद्धपोतों को नुकसान झेलने के बावजूद ईरान पीछे हटता नहीं दिख रहा. इसके बजाय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की नौसेना अपने तेज, फुर्तीले और अचानक हमला करने वाले बेड़े के दम पर इलाके में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है.

ईरान की मॉस्किटो फ्लीट छोटे और तेज हमलावर जहाजों का समूह है, जो बड़े युद्धपोतों के मुकाबले अलग रणनीति अपनाता है. ये नौकाएं सीधे टकराव से बचते हुए अचानक हमला करती हैं और तुरंत लौट जाती हैं. इस ‘हिट-एंड-रन’ रणनीति से दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता. कम लागत में तैयार होने वाली ये नावें संख्या में ज्यादा हैं, जिससे इनकी मारक क्षमता बढ़ जाती है.

नुकसान के बाद भी सक्रिय ताकत

हालिया हमलों में ईरान के बड़े युद्धपोतों को भारी नुकसान हुआ है. कई जहाज क्षतिग्रस्त होकर तट पर खड़े हैं या डूब चुके हैं. इसके बावजूद आईआरजीसी की नौसेना पूरी तरह सक्रिय है. उसका ध्यान बड़े जहाजों की जगह छोटे, तेज और छिपकर हमला करने वाले साधनों पर है. यही कारण है कि नुकसान के बाद भी उसकी सैन्य उपस्थिति कमजोर नहीं दिखती.

गुप्त ठिकाने और अचानक हमले

ईरान ने अपने समुद्री तटों पर कई गुप्त भूमिगत ठिकाने बनाए हैं. इन ठिकानों में उसकी मॉस्किटो फ्लीट छिपी रहती है. जरूरत पड़ने पर ये नावें तेजी से बाहर निकलती हैं और लक्ष्य पर हमला करती हैं. मिसाइल और ड्रोन के साथ मिलकर ये रणनीति और खतरनाक हो जाती है. इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए जोखिम बढ़ गया है.

अमेरिका के लिए चुनौती क्यों?

अमेरिकी युद्धपोत आधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस हैं, लेकिन छोटी और तेज नावों से निपटना आसान नहीं होता. ये नावें रडार से बच निकलती हैं और झुंड में हमला करती हैं. खासकर व्यावसायिक जहाज, जिनके पास सुरक्षा के सीमित साधन होते हैं, ज्यादा खतरे में हैं. यही वजह है कि क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है.

ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि दबाव बढ़ता है तो वह अपने अभियान को अन्य समुद्री मार्गों तक फैला सकता है. इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले ही तेल आपूर्ति के लिए अहम रास्ता है. यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह टकराव और गंभीर रूप ले सकता है.