'फारस की खाड़ी बनेगी अमेरिकी सैनिकों की कब्र', ईरान की US को चेतावनी, कहा- 'शार्क का भोजन बनेंगे सैनिक'
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है. ईरानी सैन्य कमांडरों ने डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है कि फारस की खाड़ी में किसी भी जमीनी कार्रवाई का अंजाम अमेरिकी सैनिकों के लिए 'शार्क का चारा' बनने जैसा होगा.
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अब तक की सबसे कठोर और खौफनाक चेतावनी दी है. ईरान की सेना ने रविवार को स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका ने फारस की खाड़ी में किसी भी प्रकार के जमीनी अभियान या कब्जे की कोशिश की, तो अमेरिकी सैनिक वहां मौजूद शार्क का भोजन बनेंगे. यह बयान ईरान के खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोलफकारी द्वारा एक वीडियो संदेश के जरिए जारी किया गया है.
जोलफकारी ने अपने बयान में कहा कि ईरानी सेना ऐसी किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए पल-पल की गिनती कर रही है. उन्होंने आक्रामक लहजे में कहा कि 'इस्लाम के योद्धा लंबे समय से ऐसी कार्रवाइयों का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे साबित कर सकें कि आक्रामकता और कब्जे का नतीजा केवल अपमानजनक बंदी होने के रूप में निकलेगा. फारस की खाड़ी की शार्क अमेरिकी कमांडरों और सैनिकों का शिकार करने के लिए तैयार हैं.'
ट्रंप को बताया इजरायल के हाथों की कठपुतली'
ईरानी जनरल ने इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा निजी हमला भी बोला. उन्होंने ट्रंप को दुनिया का सबसे बेईमान राष्ट्रपति बताते हुए उनके फैसलों को अनिश्चित करार दिया. जोलफकारी ने आरोप लगाया कि ट्रंप एक पल बातचीत की बात करते हैं और कुछ ही घंटों बाद युद्ध छेड़ने का फैसला ले लेते हैं. उन्होंने एक गंभीर दावा करते हुए कहा कि ट्रंप इजरायल के नेतृत्व के दबाव में काम कर रहे हैं और 'जेफ्री एपस्टीन केस' से जुड़े अपने अतीत के कारण मोसाद के हाथों के 'मोहरे' बन चुके हैं.
पेंटागन की गुप्त योजना और खर्ग द्वीप पर खतरा
यह तनावपूर्ण बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया है कि पेंटागन ईरान में रणनीतिक ठिकानों, विशेष रूप से खर्ग द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तटीय इलाकों में छापेमारी के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार कर रहा है. हालांकि, अभी तक किसी भी सैन्य तैनाती को आधिकारिक मंजूरी नहीं दी गई है.
गालिबाफ की चेतावनी: 'अमेरिका कर रहा है कूटनीतिक पाखंड'
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भी इसी सख्त रुख को दोहराया है. संघर्ष के 30 दिन पूरे होने पर उन्होंने कहा कि स्थिति अब 'महत्वपूर्ण चरण' में प्रवेश कर चुकी है. गालिबाफ ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह सार्वजनिक रूप से तो बातचीत का दबाव बना रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे सैन्य तनाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की मिसाइलें और होर्मुज की घेराबंदी दुश्मनों के चारों ओर फंदा कस रही है.
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