मध्य पूर्व में 'महायुद्ध', खाड़ी देशों में कुल कितने भारतीय; मोदी सरकार के सामने कौन सी चुनौती है?

इस सैन्य टकराव के बीच सबसे बड़ी चिंता खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है. अनुमान है कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों में 90 लाख से अधिक भारतीय काम करते और रहते हैं.

@vvskarthii
Anuj

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच टकराव तेजी से गंभीर रूप लेता जा रहा है. हालिया सैन्य घटनाक्रम में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद तेहरान ने खुली जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है.

ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि उसके खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर दिया जाएगा. अब खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर ईरान की ओर से मिसाइल हमलों की खबरों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे माहौल में धकेल दिया है.

अबू धाबी में तेज धमाके

सूत्रों के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गई और कुछ इलाकों में धुआं उठता देखा गया. बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (फिफ्थ फ्लीट) के सेवा केंद्र को भी मिसाइल से निशाना बनाए जाने की सूचना है, जिसकी स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की है. कतर में भी एक ईरानी मिसाइल को एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा मार गिराए जाने की बात सामने आई है. 

इजरायल-ईरान में सैन्य टकराव तेज

इस सैन्य टकराव के बीच सबसे बड़ी चिंता खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है. अनुमान है कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों में 90 लाख से अधिक भारतीय काम करते और रहते हैं. संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 39 लाख, सऊदी अरब में करीब 26.5 लाख, कुवैत में लगभग 10 लाख, कतर में करीब 8 लाख, ओमान में 6.5 लाख और बहरीन में करीब 3 लाख भारतीय मौजूद हैं. ये सभी देश उन क्षेत्रों में आते हैं जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं.

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो खाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अस्थिरता पैदा हो सकती है. इसका असर न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था बल्कि वहां कार्यरत प्रवासी समुदायों, विशेषकर भारतीयों पर पड़ेगा. तेल आपूर्ति, हवाई यातायात और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

भारत सरकार की नजर

सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है. विदेश मंत्रालय और दूतावासों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. आवश्यकता पड़ने पर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने की आपात योजनाओं पर भी विचार किया जा सकता है. पूर्व में युद्ध या संकट की स्थिति में भारत ने बड़े पैमाने पर अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के अभियान चलाए हैं, इसलिए इस बार भी ऐसी तैयारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा.

अस्थिरता की चपेट में पश्चिम एशिया?

सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-इजरायल-ईरान टकराव यदि प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष में बदलता है तो पूरा पश्चिम एशिया अस्थिरता की चपेट में आ सकता है. खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और ऊर्जा अवसंरचना इस संघर्ष को और व्यापक बना सकती है. मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात ने वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के साथ-साथ लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को भी केंद्र में ला दिया है. आने वाले दिनों में संघर्ष की दिशा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी.