'हमारी तलवार, तुम्हारा गला', ईरान में सत्ता संग्राम तेज; अपने ही नेताओं के खिलाफ भड़के कट्टरपंथी
ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है. कट्टरपंथी गुट राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और सरकार के अन्य नेताओं पर अमेरिका के साथ समझौते और सत्ता संतुलन बदलने के आरोप लगा रहे हैं.
नई दिल्ली: ईरान इस समय बड़े राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है. अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद सत्ता के शीर्ष स्तर पर नई परिस्थितियां बन गई हैं. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की सरकार पर कट्टरपंथी नेताओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका के साथ बातचीत, युद्धविराम और नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई की सीमित सार्वजनिक मौजूदगी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है. इससे देश के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं.
खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान और उसके बाद कई कट्टरपंथी समूहों ने सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाए. कुछ नेताओं ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर अमेरिका के साथ समझौते को लेकर नाराजगी जताई. रिपोर्टों के मुताबिक, इस घटनाक्रम ने सत्ता के भीतर मौजूद मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया.
मुजतबा खामेनेई की भूमिका पर चर्चा
नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक गतिविधियां सीमित रहने से भी राजनीतिक अटकलें तेज हुई हैं. विश्लेषकों का कहना है कि उनकी कम मौजूदगी के कारण सरकार के दूसरे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अधिक प्रभावशाली दिखाई दे रही है. इसी वजह से विभिन्न राजनीतिक धड़े अलग-अलग दावे और आरोप लगा रहे हैं.
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कट्टरपंथियों ने लगाए गंभीर आरोप
ईरान के कुछ कट्टरपंथी सांसदों और नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार अमेरिका के साथ बातचीत में क्रांतिकारी नीतियों से समझौता कर रही है. वहीं सरकार समर्थक पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है. इस विवाद ने संसद और राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है.
युद्धविराम और विदेश नीति पर मतभेद
अमेरिका के साथ तनाव और युद्धविराम की प्रक्रिया को लेकर भी सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर मतभेद सामने आए हैं. कुछ धड़े कूटनीतिक रास्ते का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कट्टरपंथी समूह सख्त रुख अपनाने की वकालत कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यही मतभेद आने वाले समय में ईरान की विदेश नीति को प्रभावित कर सकते हैं.
आगे की राजनीति पर रहेगी नजर
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल ईरान का शीर्ष नेतृत्व देश की स्थिरता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय दबाव से निपटने की कोशिश कर रहा है. हालांकि सत्ता के भीतर जारी खींचतान ने यह संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल सकते हैं. पूरे क्षेत्र की नजर अब ईरान के अगले कदम और नेतृत्व की रणनीति पर टिकी हुई है.