वार्ता की राह अभी भी बंद! 'अमेरिका के साथ अगली बातचीत अनिश्चित...', ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा

ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ अगली बैठक की कोई तारीख तय नहीं की गई है. उनका कहना है कि जब तक दोनों पक्ष एक बुनियादी समझौते के ढांचे पर सहमत नहीं होते, तब तक आगे की बातचीत शुरू करना संभव नहीं होगा.

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Meenu Singh

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की राह अभी भी आसान नहीं दिख रही है. हालिया घटनाक्रम से साफ संकेत मिलते हैं कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी इतने गहरे हैं कि अगला वार्ता दौर अनिश्चितता के घेरे में है.

ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ अगली बैठक की कोई तारीख तय नहीं की गई है. उनका कहना है कि जब तक दोनों पक्ष एक बुनियादी समझौते के ढांचे पर सहमत नहीं होते, तब तक आगे की बातचीत शुरू करना संभव नहीं होगा.

ढांचे पर सहमति सबसे जरूरी

खतीबजादेह ने कहा कि तेहरान की प्राथमिकता किसी भी नई बैठक से पहले एक स्पष्ट और आपसी सहमति वाला फ्रेमवर्क तैयार करना है. उनका मानना है कि बिना ठोस आधार के बातचीत करना समय की बर्बादी हो सकता है और इससे तनाव और बढ़ सकता है.

इस्लामाबाद वार्ता रहा बेनतीजा

हाल ही में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई थी, जो बिना किसी ठोस परिणाम के खत्म हो गई. इस बैठक ने यह साफ कर दिया कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है.

मतभेद बने बड़ी बाधा

ईरानी पक्ष का आरोप है कि शुरुआती दौर में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिले थे, लेकिन बाद में अमेरिकी रुख काफी सख्त हो गया, जिससे बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. कानूनी और रणनीतिक मुद्दों पर असहमति अभी भी बनी हुई है.

उन्होंने कहा, 'हम अब दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति के ढांचे को अंतिम रूप देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम किसी भी ऐसी बातचीत या बैठक में शामिल नहीं होना चाहते जो विफल होने वाली हो और जो तनाव के एक और दौर को बढ़ाने का बहाना बन सके.'

आगे की बातचीत पर संशय

हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि जल्द ही अगला दौर शुरू हो सकता है, लेकिन ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. कुछ सूत्रों ने सोमवार को फिर से बातचीत होने की संभावना जताई थी, लेकिन लॉजिस्टिक समस्याओं और आपसी सहमति की कमी के कारण इस पर संदेह बना हुआ है.