नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. ईरान की सेना ने रविवार को दावा किया कि उसने दक्षिण-पश्चिमी ईरान में एक अमेरिकी रेस्क्यू ऑपरेशन को विफल करते हुए अमेरिका के कई सैन्य विमानों को मार गिराया है. ईरान के 'खातम अल-अंबिया' सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस जवाबी कार्रवाई में दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक C-130 सैन्य परिवहन विमान को तबाह कर दिया गया, जो अब दक्षिणी इस्फहान के रेगिस्तानी इलाकों में जल रहे हैं.
इस भीषण संघर्ष की शुरुआत शुक्रवार को हुई थी, जब ईरान ने अमेरिका के एक 4.5 जेनरेशन वाले 'F-15E स्ट्राइक ईगल' फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया था. इसके बाद अमेरिका ने अपने फंसे हुए क्रू मेंबर्स को निकालने के लिए एक बड़ा बचाव अभियान शुरू किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को 'साहसिक' और 'असाधारण' करार दिया है. ट्रंप ने बताया कि दुश्मन की सीमा के भीतर पहाड़ों में फंसे एक बेहद सम्मानित कर्नल को सुरक्षित निकाल लिया गया है. हालांकि, अधिकारी को कुछ चोटें आई हैं, लेकिन वे जल्द ठीक हो जाएंगे. ट्रंप ने इसे सेना के इतिहास की दुर्लभ घटना बताते हुए कहा कि हम अपने किसी भी जांबाज को पीछे नहीं छोड़ते.
ईरानी सरकारी मीडिया ने रेगिस्तान में बिखरे हुए अमेरिकी विमानों के मलबे और वहां से उठते धुएं की तस्वीरें साझा की हैं. इससे पहले, सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी सामने आए थे जिनमें स्थानीय नागरिक राइफलों के साथ अमेरिकी पायलट की तलाश करते नजर आ रहे थे. ईरान का दावा है कि इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कम से कम पांच लोगों की मौत हुई है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे नागरिक थे या सैन्य कर्मी. इसके अलावा, ईरान ने एक इजरायली ड्रोन को भी मार गिराने की बात कही है.
ईरान का आरोप है कि पायलट को बचाने के इस 'विफल' प्रयास में अमेरिका को न केवल हेलीकॉप्टरों और C-130 विमान का नुकसान उठाना पड़ा, बल्कि एक A-10 वारथॉग लड़ाकू विमान भी उसकी मारक क्षमता का शिकार बना. दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने अभी तक ईरान द्वारा किए गए विमानों के नुकसान के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. फिलहाल क्षेत्र में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं.