मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरामको ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीन नासिर ने कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. उनका कहना है कि पहले से ही वैश्विक तेल भंडार कम स्तर पर हैं और मौजूदा हालात ने शिपिंग और बीमा क्षेत्र में भी अनिश्चितता बढ़ा दी है.
अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की लंबी बाधा वैश्विक तेल बाजार के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है. उन्होंने बताया कि इस समुद्री मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है. यदि यह आपूर्ति रुकती है तो तेल बाजार में अस्थिरता तेजी से बढ़ सकती है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.
नासिर के मुताबिक मौजूदा तनाव का असर केवल तेल आपूर्ति तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि शिपिंग और बीमा कंपनियों के सामने भी जोखिम बढ़ गया है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो विमानन, कृषि और ऑटोमोबाइल जैसे कई उद्योगों पर भी दबाव पड़ सकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों की लागत काफी हद तक ऊर्जा कीमतों पर निर्भर करती है.
इसी बीच ईरान से जुड़े एक ड्रोन हमले ने सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी को निशाना बनाया. यह अरामको की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख तेल निर्यात सुविधाओं में से एक है. हमले के बाद रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा. कंपनी के अनुसार, हमले के बाद वहां आग लग गई थी, जिसे जल्दी ही काबू में कर लिया गया और अब संयंत्र को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है.
तनाव को और बढ़ाते हुए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो मध्य पूर्व से 'एक लीटर तेल' भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा. इस बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने तेल निर्यात को रोकने की कोशिश की तो अमेरिका उससे भी ज्यादा सख्त कार्रवाई करेगा.