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रशियन दुल्हन और मोटी सैलरी वाली जॉब का ऑफर देकर भेजा जंगल, जानें कैसे रूस में फंसे 2 भाई?

Crime News: हरियाणा के दो चचेरे भाइयों का दावा है कि रूस के जंगलों में 200 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें अलग-अलग लालच देकर रूसी सेना में भर्ती होने का दबाव बनाया जा रहा है.

India Daily Live

Crime News: आजकल सोशल मीडिया समेत कई प्लेट फॉर्म्स पर विदेशों में नौकरी के शानदार ऑफर दिए जाते हैं. अगर आप भी ऐसे ऑफर पर ध्यान देते हैं तो सावधान हो जाएं. हरियाणा के दो चचेरे भाइयों के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा नहीं था.

हरियाणा के रहने वाले चचेरे भाई मुकेश (21) और सनी (24) ने दावा किया है कि रूस में 200 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें रशियन दुल्हन और मोटी सैलरी वाली नौकरी का झांसा देकर रूस की सेना में शामिल होने के लिए दवाब बनाया जा रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों भाइयों ने दावा किया है कि 200 से अधिक लोग (ज्यादातर दक्षिण एशिया निवासी) रूस और बेलारूस की सीमा पर रूस के जंगलों में फंसे हुए हैं.

इमिग्रेशन एजेंट रचते हैं साजिश

यहां इन्हें धोखे से इमिग्रेशन एजेंटों के शिविरों में रखा गया है. उन्होंने दावा किया है कि ये एजेंट उन्हें रूसी सेना में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहे हैं. चचेरे भाइयों ने कहा कि उन्हें झूठ बोलकर जर्मनी के बजाय बैंकॉक भेजा गया. यहां उन्हें एक होटल में नौकरी देने का वादा किया गया था.

रूसी बॉर्डर के जंगलों में फंसे हैं लोग

इसके बाद उन्हें बैंकॉक से फ्लाइट के जरिए बेलारूस ले जाया गया और वहां से सभी को जंगलों के रास्ते में रूस में एंट्री कराने के लिए कैंप्स में रखा गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यहां इमिग्रेशन एजेंट दक्षिण एशियाई लोगों को रूसी वर्क परमिट, रशियन दुल्हन और सेना में शामिल होने पर रूसी पासपोर्ट देने का लालच दे रहे हैं. 

भूखा-प्यासा रखकर करते हैं परेशान

अपने पूरे शरीर पर चोटों के निशान दिखाते हुए उन्होंने दावा किया कि उन्हें इन शिविरों में एजेंट्स ने भूखा, प्यासा रखा. शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया. दोनों भाइयों ने कहा कि जब उन्होंने सेना में शामिल होने और यूक्रेन में लड़ने से इनकार कर दिया, तो उन्हें बिना परमिट रूस में घुसने के आरोप में मास्को की जेल में डाल दिया गया. 

एक वकील की मदद से छूटे दोनों भाई

मॉस्को के एक वकील ने उन्हें जेल से बाहर निकलने और घर लौटने में मदद की. उन्होंने कहा कि रूसी वकील ने अपने काम के लिए 6 लाख रुपये लिए थे. करनाल के रहने वाले चचेरे भाइयों ने कहा कि हमें 15 दिनों तक खाना नहीं दिया गया.

मॉस्को के वकील ने कहा कि जब ये एजेंट दूसरे देशों से युवाओं को रूसी सेना में शामिल करने और यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए लाते हैं तो उन्हें 2 लाख रुपये तक का पेमेंट किया जाता है. मुकेश और सनी को जर्मनी भेजने के लिए दोनों के परिवारों ने 35 लाख और 25 लाख रुपये खर्च किए.