अगले 5 सालों में दुनिया पर टूटेगा भीषण गर्मी का कहर, रिकॉर्ड हाई पर पहुंच जाएगा तापमान, डरा रही UN की रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र और यूके मेट ऑफिस की रिपोर्ट के मुताबिक अगले पांच सालों में वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आर्कटिक क्षेत्र बाकी दुनिया से कहीं ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है.
संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी और यूके मेट ऑफिस द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के मुताबिक अगले पांच सालों तक दुनिया का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बने रहने की आशंका है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हमारी धरती बहुत तेजी से गर्म हो रही है और आर्कटिक क्षेत्र दुनिया के बाकी हिस्सों के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है.
पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट के तय सीमा होगी पार
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2026 से 2030 के बीच वैश्विक औसत तापमान इंडस्ट्रियल एज 1850-1900 से पहले के मुकाबले 1.3 डिग्री से 1.9 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस बात की पूरी आशंका है कि इन पांच सालों में से कम से कम एक साल ऐसा होगा जो पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट के तहत तय की गई 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर जाएगा.
शोधकर्ताओं ने समझाया कि सिर्फ किसी एक साल में तापमान का 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर जाना यह नहीं दिखाता कि पेरिस समझौता पूरी तरह फेल हो गया है क्योंकि इस समझौते में लगभग 20 साल के लंबे समय के औसत तापमान को मापा जाता है. हालांकि वैज्ञानिकों ने यह चेतावनी भी दी है कि दुनिया इस खतरनाक सीमा के बेहद करीब पहुंच रही है और भविष्य में तापमान अक्सर इस लिमिट को पार कर सकता है.
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच कोई एक साल 2024 से भी ज्यादा गर्म हो सकता है जो कि अब तक का सबसे गर्म साल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में इस बढ़ोतरी के लिए मुख्य रूप से क्लाइमेट चेंज और लगातार बढ़ रहा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन जिम्मेदार है.
आर्कटिक क्षेत्र पर पड़ेगा असर
इस दौरान सबसे ज्यादा असर आर्कटिक क्षेत्र पर पड़ेगा जहां सर्दियों का तापमान सामान्य से लगभग 2.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. इतनी तेजी से बढ़ते तापमान के कारण बेरेंट्स सागर बेरिंग सागर और ओखोत्स्क सागर जैसे इलाकों में समुद्री बर्फ तेजी से पिघल सकती है.
वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि आर्कटिक के गर्म होने से दुनिया भर का मौसम चक्र बिगड़ सकता है जिससे खतरनाक तूफान, बेमौसम बारिश और चरम मौसमी घटनाएं बढ़ सकती हैं. इसके असर से उत्तरी यूरोप, अलास्का, साइबेरिया और साहेल क्षेत्र में ज्यादा बारिश हो सकती है जबकि अमेजन के जंगलों को सूखे का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, इस साल के अंत में 'अल नीनो' वेदर सिस्टम के मजबूत होने की भी आशंका है जो प्रशांत महासागर को गर्म करके वैश्विक तापमान को और बढ़ा सकती है.