Gaza Peace Summit: गाजा संघर्ष को खत्म करने और स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मिस्र सोमवार को शर्म-अल-शेख में अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन की मेजबानी करेगा. इस समिट में 20 से अधिक देशों के शीर्ष नेता शामिल होंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें भाग लेंगे. मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने पुष्टि की है कि यह बैठक गाजा युद्ध को समाप्त करने, मध्य पूर्व में स्थिरता लाने और शांति बहाली के लिए निर्णायक साबित हो सकती है.
यह समिट उस समय हो रही है जब इजराइल ने हाल ही में ट्रंप द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम और बंधक वापसी योजना के पहले चरण को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत हमास को सोमवार दोपहर तक सभी इजराइली बंधकों को रिहा करना होगा. इनमें लगभग 20 जीवित और 28 मृत इजराइलियों के शव शामिल हैं. इसके बदले में इजराइल करीब 250 फिलिस्तीनी कैदियों और गाजा के 1700 बंदियों को रिहा करेगा. साथ ही गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति भी बढ़ाई जाएगी.
Axios रिपोर्ट के अनुसार, इस सम्मेलन में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, कतर, यूएई, जॉर्डन, तुर्की, सऊदी अरब, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, स्पेन, जापान, अज़रबैजान, आर्मेनिया, हंगरी, भारत, एल साल्वाडोर, साइप्रस, ग्रीस, बहरीन, कुवैत और कनाडा जैसे देशों के नेता या विदेश मंत्री भाग लेंगे. ईरान को भी आमंत्रण भेजा गया है, हालांकि इजराइल इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगा.
यह बैठक गाजा में युद्ध समाप्ति और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती के साथ सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा की. राष्ट्रपति ट्रंप सोमवार को इजराइल की संसद 'नेसट' को संबोधित करने के बाद मिस्र पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि हमारे साथ दुनिया के कई नेता आ रहे हैं जो मध्य पूर्व में शांति चाहते हैं.
युद्धविराम योजना के अगले चरणों में गाजा की सरकार, इजराइली सेना की वापसी और हमास के निरस्त्रीकरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होगी. यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को हमास के दक्षिणी इजराइल पर हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें 1200 लोगों की मौत हुई थी और 251 को बंधक बनाया गया था. तब से अब तक गाजा में 67,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें 18,000 से अधिक बच्चे शामिल हैं.जनवरी में शुरू हुआ पिछला युद्धविराम समझौता दो महीने बाद ही टूट गया जब इजराइल ने अपने सैन्य अभियान फिर से शुरू कर दिए, क्योंकि वह तीन-चरणीय योजना के पहले चरण से आगे नहीं बढ़ पाया था.