नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को हासिल करने को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. उनका कहना है कि यह अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए बेहद जरूरी है. इसी मुद्दे पर जब यूरोप के कुछ देशों ने विरोध जताया, तो ट्रंप प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए यूरोप के 8 देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया. यह टैरिफ 1 फरवरी से लागू होगा.
राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की मांग नहीं मानी गई, तो यह टैरिफ 1 जून से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा. इस चेतावनी के बाद यूरोप में चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक रिश्तों में और ज्यादा तनाव पैदा हो सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.
राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले के जवाब में यूरोपीय संघ ने बड़ा कदम उठाया है. यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ लंबे समय से चल रहे ट्रांसअटलांटिक व्यापार समझौते को फिलहाल रोक दिया है. यूरोपीय संसद के वरिष्ठ सदस्यों ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मौजूदा हालात में इस समझौते को मंजूरी देना संभव नहीं है. नए टैरिफ ने राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल दिया है.
यूरोपीय संसद के सदस्य सिगफ्रीड मुरेशान ने बताया कि सांसदों ने पिछले जुलाई में यूरोपीय संघ-अमेरिका व्यापार समझौते के साथ बढ़ने की तैयारी की थी, जिससे यूरोपीय संघ में अमेरिकी आयात पर शुल्क समाप्त हो जाता. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि हमें पिछले जुलाई में हुए यूरोपीय संघ-अमेरिका व्यापार समझौते को यूरोपीय संसद में जल्द ही मंजूरी देनी थी.
इस समझौते पर पिछले साल ट्रंप और यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हस्ताक्षर किए थे. इसमें अमेरिका ने यूरोपीय आयात पर 15 फीसदी शुल्क लगाया था, जबकि यूरोप ने अमेरिकी निर्यात पर शुल्क नहीं लगाने पर सहमति दी थी. अब ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते तनाव के कारण यह समझौता अटक गया है. यूरोपीय नेताओं का कहना है कि मौजूदा माहौल में अमेरिकी उत्पादों पर शून्य टैरिफ देना संभव नहीं है.
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने ट्रंप की टिप्पणियों को आश्चर्यजनक बताया. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा पहले से ही व्यापक आर्कटिक स्थिरता से जुड़ी हुई है. रासमुसेन के अनुसार, ग्रीनलैंड में बढ़ी हुई सैन्य मौजूदगी का उद्देश्य पूरे आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा को मजबूत करना है, न कि किसी तरह का टकराव बढ़ाना. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोपेनहेगन इस मुद्दे पर यूरोपीय आयोग और अन्य साझेदार देशों के साथ लगातार संपर्क में है और सामूहिक रूप से आगे की रणनीति पर काम कर रहा है.
यूरोपीय संघ स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने एक संयुक्त बयान जारी कर ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि टैरिफ न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाएंगे, बल्कि यूरोप और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को भी कमजोर करेंगे.
उन्होंने जोर देकर कहा कि यूरोप एकजुट और समन्वित रहेगा तथा अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. बयान में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के प्रति पूर्ण समर्थन भी जताया गया. जर्मनी में यूरोपीय संसद के वरिष्ठ सदस्य और यूरोपियन पीपल्स पार्टी के प्रमुख मैनफ्रेड वेबर ने चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी EU–US ट्रेड डील के पक्ष में है, लेकिन ग्रीनलैंड को लेकर दी जा रही धमकियों के मौजूदा माहौल में इस पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा.