Eric Garcetti: भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने गुरुवार को अमेरिका और भारत के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा इसे तब और मजबूत करने की जरूरत है जब दुनिया में संघर्षों की संख्या बढ़ रही है. गार्सेटी ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि मुझे पता है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पसंद करता है लेकिन संघर्ष के समय में रणनीतिक स्वायत्तता जैसी कोई चीज नहीं होती है.
गार्सेटी ने कहा कि संकट के क्षणों में हमें एक-दूसरे को जानने की आवश्यकता होगी. मुझे परवाह नहीं है कि हम इसे क्या नाम देते हैं, लेकिन हमें यह जानने की आवश्यकता होगी कि हम भरोसेमंद दोस्त,भाई-बहन और जरूरत के समय में सहकर्मी हैं.
#WATCH | US Ambassador to India Eric Garcetti says, "I know that India and I respect that India likes its strategic autonomy, but in times of conflict, there is no such thing as strategic autonomy. We will in crisis moments need to know each other. I don't care what title we put… pic.twitter.com/NxQsOrsfoN— ANI (@ANI) July 11, 2024
गार्सेटी ने अमेरिका-भारत संबंधों में निवेश के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी और भारतीय होने के नाते यह याद रखना हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि हम इस रिश्ते में जितना अधिक निवेश करेंगे हमें उतना ही अधिक लाभ मिलेगा. उन्होंने अपने भारतीय समकक्षों से आग्रह किया कि वे द्विपक्षीय संबंधों को हल्के में न लें. हालांकि यह पहले से कहीं ज्यादा व्यापक और गहरा है लेकिन यह अभी भी उतना मजबूत नहीं है. हमें इसे मजबूत करने के लिए कई मोर्चों पर लड़ाइयां लड़नी होंगी.
#WATCH | US Ambassador to India Eric Garcetti says, "...It's important for us as Americans and as Indians to remember the more we put into this relationship, the more we will get out. The more we insist on a kind of cynical calculation in the place of a trusted relationship, the… pic.twitter.com/AKPBe0BqDi
— ANI (@ANI) July 11, 2024
पीएम मोदी की रूस यात्रा के बाद अमेरिका ने कहा था कि रूस के साथ उसके चिंताजनक संबंधों के बावजूद भारत उसका प्रमुख रणनीतिक साझेदार बना हुआ है. बाइडन प्रशासन की टिप्पणी के बाद भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की यह टिप्पणी सामने आई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस का दौरा किया, जिस पर यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के कारण पश्चिमी देशों की नजर थी.