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India Daily

'अभी डील करो वरना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो', डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त किए तेवर

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित या समाप्त करे, क्योंकि उसे हथियार प्रसार का खतरा मानता है जबकि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका कार्यक्रम केवल ऊर्जा और वैज्ञानिक शोध के लिए है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'अभी डील करो वरना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो', डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त किए तेवर
Courtesy: pinterest

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी भाषा और कड़ी कर दी है. उन्होंने साफ कहा कि तेहरान को एक ठोस और अर्थपूर्ण परमाणु समझौते पर सहमत होना होगा, अन्यथा “बुरे परिणाम” भुगतने पड़ सकते हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच परोक्ष वार्ता चल रही है. बातचीत जारी रहने के बावजूद मध्य-पूर्व में सैन्य गतिविधियों में तेज वृद्धि से स्थिति बेहद संवेदनशील बन गई है.

ज्यादा समय नहीं दे सकते

वॉशिंगटन में शांति बोर्ड की बैठक में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बातचीत का रास्ता खुला रखे हुए है, लेकिन यह अनिश्चितकाल तक नहीं चलेगा. उनका कहना था कि ईरान के साथ सार्थक समझौता करना वर्षों से कठिन रहा है. उन्होंने तेहरान से “शांति के रास्ते” पर आने का आह्वान भी किया. अमेरिकी प्रशासन का संकेत है कि समझौते के बिना हालात गंभीर दिशा में जा सकते हैं.

 जिनेवा में परोक्ष वार्ता जारी

अमेरिकी और ईरानी अधिकारी जिनेवा में मध्यस्थों के जरिए बातचीत कर रहे हैं. अमेरिकी प्रतिनिधि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची से अप्रत्यक्ष संपर्क में हैं. उद्देश्य यह है कि परमाणु विवाद खुली टकराव की स्थिति में न बदले. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ईरान जल्द लिखित प्रस्ताव दे सकता है, जिसमें वह अमेरिकी चिंताओं के समाधान की रूपरेखा पेश करेगा.

 परमाणु कार्यक्रम पर टकराव

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित या समाप्त करे, क्योंकि उसे हथियार प्रसार का खतरा मानता है जबकि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका कार्यक्रम केवल ऊर्जा और वैज्ञानिक शोध के लिए है. तेहरान ने यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह छोड़ने की मांग को संप्रभु अधिकार का उल्लंघन बताया है. यही मुद्दा वार्ता में सबसे बड़ा अवरोध बना हुआ है.

क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ा

वार्ता के साथ-साथ अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. हाल के दिनों में एफ-22, एफ-35 और एफ-16 जैसे उन्नत लड़ाकू विमान तथा नौसैनिक संसाधन क्षेत्र में तैनात किए गए हैं. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अपने सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा तथा प्रतिरोध क्षमता मजबूत करने के लिए है. इस सैन्य जमावड़े ने तनाव को और बढ़ा दिया है.