Lifestyle News: कुछ लोगों को लगता है कि हार्ट अटैक हमेशा फिल्मों की तरह सीने में अचानक और तेज दर्द के साथ आता है. कैलिफोर्निया के एक मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट ने इस सोच को पूरी तरह गलत ठहराया है. उन्होंने बताया है कि कैसे हमारी एक छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है. दो दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाले अमेरिकी इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजय भोजराज ने चेतावनी दी है कि हार्ट अटैक रातों-रात नहीं आते, बल्कि ये सालों से हमारे शरीर में चुपचाप पनप रहे होते हैं.
डॉ. भोजराज ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि हार्ट अटैक को लेकर सबसे बड़ा मिथक यही है कि यह बिना किसी चेतावनी के आता है. सच्चाई यह है कि बहुत कम मामलों में इसकी शुरुआत सीधे सीने के दर्द से होती है. ज्यादातर लोग हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों को इसलिए पहचान नहीं पाते, क्योंकि वे किसी बड़े या अचानक दिखने वाले लक्षण का इंतजार कर रहे होते हैं.
2026 में भारत में हार्ट अटैक के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखने को मिली है. खासकर अधेड़ उम्र और जवान लोगों में ज्यादा दिखा है. दिल से जुड़ी बीमारियों में 45-50% बिना लक्षण वाले (साइलेंट) हार्ट अटैक के मामले हैं. डेटा बताता है कि भारतीयों को दिल की बीमारी दूसरे देश के लोगों की तुलना में 5-10 साल पहले हो रही है, अक्सर 30 और 40 की उम्र में यह हो रहा है.
डॉक्टर ने रूटीन मेडिकल चेक-अप को लेकर भी एक कड़वी सच्चाई उजागर की है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपनी लैब रिपोर्ट में सिर्फ 'नॉर्मल' देखकर खुश न हो जाएं.
डीप एनालिसिस है जरूरी: स्टैंडर्ड चेक-अप में अक्सर कोलेस्ट्रॉल के पैटर्न, इन्फ्लेमेशन (सूजन) के निशान और लंबे समय से चल रहे ब्लड प्रेशर के ट्रेंड को ऊपरी तौर पर देखकर अनदेखा कर दिया जाता है.
भविष्य का अलर्ट: डॉक्टर का कहना है, "मैंने अनगिनत मरीजों का इलाज किया है. दिक्कत यह नहीं है कि दिल की बीमारी अचानक होती है, दिक्कत यह है कि यह चुपचाप बढ़ती है. बचाव का मतलब लक्षणों का इंतजार करना नहीं, बल्कि समय रहते अपने रिस्क को समझना है."
सालों तक इमरजेंसी वार्ड की भागदौड़ संभालने के बाद डॉ. भोजराज ने बताया कि हार्ट अटैक के शिकार लगभग हर मरीज का पहला रिएक्शन यही होता है. "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ ऐसा होगा." उनके शरीर में खतरा 5, 10 या 15 सालों से बढ़ रहा था, लेकिन किसी ने उन वार्निंग साइन्स को समय रहते डिकोड नहीं किया.
अब समय आ गया है कि हम दिल को नुकसान पहुंचने के बाद इलाज करने के बजाय, अपनी मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से बचाव पर ध्यान दें. जैसा कि डॉ. भोजराज कहते हैं कि अपने शरीर के जोर से चीखने का इंतजार मत करो.
सब्जियां और फल: हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, ब्रोकली, गाजर, बेरी, सेब और खट्टे फल विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं.
साबुत अनाज: ओट्स, जौ, क्विनोआ और ब्राउन राइस LDL (खराब) कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करते हैं.
फैटी मछली: सैल्मन, मैकेरल और सार्डिन में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो सूजन कम करता है.
हेल्दी फैट और नट्स: ऑलिव ऑयल, अखरोट, बादाम, अलसी के बीज और चिया सीड्स.
फलियां: बीन्स, दाल और छोले प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के बेहतरीन सोर्स हैं.
लीन प्रोटीन: बिना स्किन वाला चिकन, टर्की और टोफू.
लो-फैट डेयरी: स्किम मिल्क और ग्रीक योगर्ट (बिना मीठा किया हुआ). मेयो क्लिनिक
मेयो क्लिनिक
नमक/सोडियम: प्रोसेस्ड, कैन्ड और फास्ट फूड कम खाएं ताकि सोडियम रोज़ाना 1,500-2,300 mg से कम रहे.
सैचुरेटेड और ट्रांस फैट: मक्खन, चरबी, तले हुए खाने और ज़्यादा फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट से बचें.
रेड और प्रोसेस्ड मीट: बीफ कम खाएं और बेकन, सॉसेज और हॉट डॉग से बचें.
एडेड शुगर: मीठे ड्रिंक्स, स्नैक्स और डेज़र्ट कम खाएं.
डिस्क्लेमर: सलाह वाला यह कंटेंट सिर्फ़ जेनेरिक जानकारी देता है. यह किसी भी तरह से क्वालिफाइड मेडिकल राय का विकल्प नहीं है. ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा किसी स्पेशलिस्ट या अपने डॉक्टर से सलाह लें. इंडिया डेली लाइव इस जानकारी की जिम्मेदारी नहीं लेता है.