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ट्रंप की टीम ने चीन छोड़ते ही डस्टबिन में फेंके फोन और गिफ्ट्स, आखिर क्या था इतना बड़ा डर?

डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने कथित तौर पर चीनी अधिकारियों द्वारा दिए गए गिफ्ट, बैज, पिन और बर्नर फोन एयर फोर्स वन में चढ़ने से पहले कूड़ेदान में फेंक दिए.

ChatGPT(प्रतिकात्मक)
Reepu Kumari

नई दिल्ली: अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तकनीकी जंग अब खुलकर दुनिया के सामने दिखाई देने लगी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के दौरान जो हुआ, उसने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने चीन से मिले हर सामान को एयर फोर्स वन में चढ़ने से पहले फेंक दिया.

बताया जा रहा है कि यह फैसला साइबर जासूसी और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के डर को देखते हुए लिया गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पोस्ट के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया. लोग इसे अमेरिका और चीन के बीच गहरे अविश्वास का संकेत मान रहे हैं. 

वायरल वीडियो में क्या है?

ऑनलाइन एक वीडियो भी वायरल हो रहा है. साथ ही कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. आरोप लगाया गया है कि यात्रा के दौरान जारी किए गए गिफ्ट्स, मान्यता बैज, स्मारक पिन, डिस्पोजेबल फोन और अन्य सामग्री को सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के हिस्से के रूप में विमान की सीढ़ियों के पास कूड़ेदान में फेंक दिया गया था.

पत्रकार एमिली गुडिन द्वारा 15 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना के बारे में पोस्ट करने के बाद इन दावों पर और अधिक ध्यान दिया गया. प्रस्थान से कुछ समय पहले के दृश्य का वर्णन करते हुए उन्होंने लिखा:

बर्नर फोन का ही सहारा

रिपोर्ट्स में आगे दावा किया गया कि अमेरिकी अधिकारियों ने यात्रा के दौरान पर्सनल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया. इसके बजाय, प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कथित तौर पर चीन में रहते हुए केवल अस्थायी बर्नर फोन का ही सहारा लिया. बताया गया कि उनके पर्सनल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट विमान में विशेष फैराडे बैग में रखे गए थे, जिन्हें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल को ब्लॉक करने और अनऑथराइज्ड ट्रैकिंग या इंटरसेप्शन को रोकने के लिए डिजाइन किया गया था. इस खबर के सामने आने के बाद कई लोग ये दावा कर रहे हैं कि क्या ट्रंप जिनपिंग से डर गए हैं. 

कई मुद्दों पर बढ़ा तनाव?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बीजिंग में अहम बैठक हुई. दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध, टैरिफ, सेमीकंडक्टर तकनीक, ताइवान मुद्दा, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियों को लेकर बातचीज हुई.