अमेरिका की नीति पूरी दुनिया में किसी से भी नहीं छिपी है. जरुरत पड़ने पर किसी को भी गुरु बनाने वाले अमेरिका ने जरूरत पूरे ना होने पर पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया. इतना ही नहीं उसके एक्शन ने पाकिस्तान के लिए नई चिंता पैदा कर दी है.
अमेरिका ने ऐलान किया है कि वह अपने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान के पेशावर स्थित कॉन्सुलेट को बंद करने जा रहा है. अमेरिका के इस कदम से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ सकती है. अफगानिस्तान इस इलाके में हमले तेज कर सकता है.
पाकिस्तान अभी कुछ दिनों पहले तक ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कराने में जुटा था. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाक आर्णी चीफ आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जमकर तारीफ की थी. हालांकि पाकिस्तान की यह कोशिश सफल नहीं हुई और अमेरिकी राष्ट्रपति ने इंस्टेंट रिएक्शन दे दिया. दूसरी ओर अमेरिका अब उम्मीद भरी निगाहों से भारत की ओर देख रहा है.
एक समय पर भारत के लिए मुसीबत खड़ी करने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब भारतीय कंपनियों के साथ अपना गहरा रिश्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं. मिल रही जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप भारत के टेक, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स समेत अन्य कई सेक्टर्स में लगभग 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश करने का प्लान कर रहे हैं. इतना ही नहीं अमेरिका ने बंगाल में बीजेपी की प्रचंड जीत की बधाई दी है.
The @StateDept has announced the phased closure of the U.S. Consulate General in Peshawar. As we transition to a new chapter, with the U.S. Consulate General’s operations shifting to @USEmbIslamabad, we will continue our important diplomatic work in partnership with the people…
— Bureau of South and Central Asian Affairs (SCA) (@State_SCA) May 6, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि भारत के लोग भाग्यशाली हैं, जो उनके पास मोदी है. ट्रंप के इस नए रुप से पाकिस्तान को गहरा झटका लगा है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पेशावर के पख्तूनख्वा प्रांत से जुड़े सभी राजनयिक कामकाज अब इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास से संभाले जाएंगे.
बता दें कि पेशावर काफी लंबे समय से सीमा पार तनाव और आतंकवाद विरोधी अभियानों के जाल में फंसा रहा है. अभी अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार के आने के बाद यह और भी ज्यादा तेज हो गया है. ऐसे समय में उस इलाके से अमेरिका का कॉन्सुलेट बंद होना एक अहम कूटनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.
Under President Trump’s leadership investment is flowing back into the United States at record levels! Indian companies plan to invest over $20.5 billion in various sectors including tech, manufacturing, and pharmaceuticals. This includes the 12 Indian companies who announced…
— Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) May 6, 2026
अमेरिका के इस कदम से पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है. अमेरिका के हटते ही इलाके में तालिबान का दवाब और भी ज्यादा बढ़ जाएगा. क्योंकि अफगानिस्तान तालिबान इस इलाके को अपनी राजधानी मानते हैं, जिसेक लिए वह अलग-अलग समूहों के जरिए शुरू से ही लड़ते रहे हैं. पाकिस्तान के इस इलाके को अफगानियों ने शुरू से अपना बताया है. ऐसे में अब वह इसपर कब्जा करने की कोशिश तेज कर सकते हैं.