AQI

Donald Trump Tariff War: 'तेजी से लुप्त हो रहा ब्रिक्स', 10% टैरिफ का राग फिर से अलाप रहे डोनाल्ड ट्रम्प, खुलेआम दे रहे धमकी!

डोनाल्ड ट्रंप की ब्रिक्स पर यह नई चेतावनी बताती है कि दुनिया की आर्थिक लड़ाई अब सिर्फ मुद्रा या व्यापार की नहीं रही, बल्कि ताकत और प्रभुत्व की भी हो गई है. आने वाले दिनों में इसका असर केवल कूटनीतिक मंचों तक नहीं, बल्कि आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है.

Pinterest
Reepu Kumari

Donald Trump Tariff War: दुनिया की अर्थव्यवस्था में जब-जब हलचल होती है, अमेरिका और उसके फैसलों की चर्चा सबसे पहले होती है. इस बार पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर ब्रिक्स देशों को चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कह दिया है कि अगर ब्रिक्स देश अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कमजोर करने की कोशिश करेंगे, तो उनके उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा.

व्हाइट हाउस के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने ब्रिक्स देशों की आलोचना करते हुए कहा कि यह गठबंधन अब तेजी से लुप्त हो रहा है. उन्होंने दावा किया कि ब्रिक्स का मकसद डॉलर की जगह दूसरी मुद्रा को लाना है, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ है. उनके मुताबिक, ऐसी किसी भी कोशिश को अमेरिका बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा.

क्या है ब्रिक्स और ट्रंप की नाराजगी?

ब्रिक्स एक आर्थिक समूह है, जिसमें भारत, चीन, रूस, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं. हाल ही में इसमें ईरान, सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और इंडोनेशिया जैसे देश भी शामिल हो चुके हैं. यह समूह वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर की जगह स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है.

डोनाल्ड ट्रंप को यही बात खटक रही है. उनका कहना है कि ब्रिक्स अमेरिका के आर्थिक वर्चस्व को चुनौती देना चाहता है, और ऐसे में वह चुप नहीं बैठेंगे. यही वजह है कि उन्होंने 1 अगस्त से ब्रिक्स देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी है, अगर समझौता नहीं होता है.

ट्रंप की चेतावनी का क्या असर दिखा?

ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी टैरिफ की धमकी के बाद ब्रिक्स देशों की हालिया बैठक में भाग लेने वालों की संख्या कम हो गई. उनका कहना है कि अब ब्रिक्स देश भी डरने लगे हैं कि कहीं अमेरिका सख्त कदम न उठा ले.

वहीं, ब्रिक्स की तरफ से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कुछ देशों ने साफ किया है कि वे डॉलर की निर्भरता को कम जरूर करना चाहते हैं, पर अमेरिका से टकराव नहीं चाहते. यह मामला अब कूटनीति और व्यापार दोनों का हिस्सा बन चुका है.

आम लोगों के लिए क्या मायने रखती है यह टक्कर?

अब सवाल ये है कि इसका असर आम लोगों पर क्या पड़ेगा? अगर ट्रंप दोबारा सत्ता में आते हैं और टैरिफ वाकई लागू होता है, तो भारत जैसे देशों से अमेरिका को भेजे जाने वाले सामान महंगे हो सकते हैं. इसका सीधा असर वहां रहने वाले भारतीय व्यापारियों और कंपनियों पर पड़ेगा.

दूसरी तरफ, ट्रंप की ये सख्त व्यापार नीति अमेरिकी जनता को “मेड इन यूएस” सामान अपनाने के लिए मजबूर कर सकती है, लेकिन इसका असर वैश्विक व्यापार पर भी पड़ेगा. इस टकराव से भारत जैसे देशों को अपने आर्थिक फैसलों में ज्यादा संतुलन बनाना पड़ेगा, ताकि दोनों तरफ रिश्ते बने रहें. डोनाल्ड ट्रंप की ब्रिक्स पर यह नई चेतावनी बताती है कि दुनिया की आर्थिक लड़ाई अब सिर्फ मुद्रा या व्यापार की नहीं रही, बल्कि ताकत और प्रभुत्व की भी हो गई है. आने वाले दिनों में इसका असर केवल कूटनीतिक मंचों तक नहीं, बल्कि आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है.