'मौत के साए में गुजरे 15 दिन', मिडिल ईस्ट जंग के बीच बहरीन से लौटीं मॉडल ने सुनाई युद्ध की खौफनाक दास्तान

प्रियंका पाठक ने बताया कि जैसे ही संघर्ष शुरू हुआ, हालात तेजी से बिगड़ गए. चारों ओर धमाकों की आवाज गूंजने लगी और आसमान में मिसाइलों व ड्रोनों की आवाज साफ सुनाई देती थी.

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Sagar Bhardwaj

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच बहरीन में फंसे भारतीयों की स्थिति बेहद कठिन हो गई थी. शाहजहांपुर की रहने वाली मॉडल प्रियंका पाठक ने उन भयावह दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे उनका परिवार मौत के साए में जी रहा था. पति और छोटे बच्चे के साथ उन्होंने 15 दिन तक एक बिल्डिंग के बेसमेंट में छिपकर गुजारे. भारत लौटने के बाद उन्होंने जो अनुभव साझा किया, वह युद्ध की असल तस्वीर को सामने लाता है.

बेसमेंट में बीते खौफनाक दिन

प्रियंका पाठक ने बताया, जैसे ही संघर्ष शुरू हुआ, हालात तेजी से बिगड़ गए. चारों ओर धमाकों की आवाज गूंजने लगी और आसमान में मिसाइलों व ड्रोनों की आवाज साफ सुनाई देती थी. सुरक्षा के लिए उन्हें अपना घर छोड़कर बेसमेंट में शरण लेनी पड़ी, जहां अंधेरा और घुटन भरा माहौल था.

खाने-पीने की भारी किल्लत

परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बुनियादी जरूरतों की थी. प्रियंका ने बताया कि कई बार उन्हें भूखे-प्यासे रहना पड़ा. छोटे बच्चे के लिए दूध और जरूरी सामान जुटाना बेहद मुश्किल हो गया था. कुछ दिन तो उन्होंने कार के अंदर ही समय बिताया, क्योंकि बाहर निकलना बेहद खतरनाक था.

सैन्य क्षेत्र के पास बढ़ा खतरा

स्थिति और गंभीर इसलिए थी क्योंकि उनके ठिकाने के पास ही अमेरिकी सेना का एक बेस मौजूद था. इस वजह से वह इलाका लगातार निशाने पर था. मिसाइलों के गिरने से जमीन तक कांप जाती थी और लोग दहशत में इधर-उधर भागते नजर आते थे, लेकिन कहीं भी पूरी सुरक्षा नहीं थी.

वतन वापसी और भावुक अपील

कड़ी मशक्कत के बाद प्रियंका का परिवार किसी तरह भारत लौट सका. घर पहुंचने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली, लेकिन साथ ही चिंता भी जताई कि अब भी कई भारतीय वहां फंसे हैं. उन्होंने सरकार से अपील की कि जल्द से जल्द सभी को सुरक्षित बाहर निकाला जाए.