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'ईरान में नहीं लगाएंगे एक भी पैसा...', शांति समझौते के बीच G7 समिट में डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एलान, नेतन्याहू को भी दी चेतावनी

फ्रांस के एवियन में G7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका ईरान में कोई पैसा नहीं लगाएगा.

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Ashutosh Rai

दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के नेता इन दिनों फ्रांस के एवियन शहर में G7 समिट के लिए जमा हुए हैं. इस बैठक में ईरान, यूक्रेन, लेबनान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यहां कई अहम बातें कहीं जो पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही हैं.

ट्रंप का बड़ा बयान

G7 समिट में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका ईरान में किसी तरह का कोई निवेश नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि कल जो अफवाहें उड़ी थीं, वे पूरी तरह बेबुनियाद थीं. दरअसल कुछ खबरों में यह कहा जा रहा था कि ईरान के साथ शांति समझौते की शर्तों में अमेरिका की तरफ से 300 अरब डॉलर का एक निवेश कोष बनाने की इजाजत दी जा सकती है. इन खबरों को ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर झूठी खबर करार दिया था. हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जरूर कहा था कि गल्फ कोस्ट गठबंधन ईरान को फायदा दे सकता है, बशर्ते वह अपनी जिम्मेदारियां पूरी करे.

नेतन्याहू से अच्छे संबंध

ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने रिश्तों को अच्छा बताया लेकिन साथ ही यह भी कह दिया कि लेबनान में इजरायल का रवैया उन्हें पसंद नहीं आया. उन्होंने कहा कि लेबनान एक वक्त बहुत अच्छा देश था और उसके साथ सबसे बुरा बर्ताव हुआ है. ट्रंप ने नेतन्याहू को सीधे कहा कि अब लेबनान के मामले में अधिक जिम्मेदारी दिखानी होगी. गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में इजरायल ने दक्षिण लेबनान में हफ्तों के सैन्य अभियान के बाद युद्धविराम पर सहमति जताई थी लेकिन रविवार को बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर फिर हमला किया गया.


होर्मुज पर यूरोप की नजर

इस समिट में ईरान और मध्य पूर्व के हालात के अलावा यूक्रेन की सुरक्षा, आर्थिक असमानता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य भी चर्चा के बड़े विषय हैं. यूरोपीय देश इस मौके का इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की मांग के लिए करना चाहते हैं. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि इस रास्ते को बिना किसी रोक-टोक के खुला रखना जरूरी है और लेबनान में भी युद्धविराम होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा के मामले में निर्भरता को हथियार की तरह इस्तेमाल होने से रोकना होगा. G7 में अमेरिका, यूके, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, इटली और जापान के साथ EU और यूक्रेन के प्रतिनिधि भी शामिल हैं.