होर्मुज में फंसे जहाजों को बचाने उतरा अमेरिका, शुरू किया 'प्रोजेक्ट फ्रीडम'; बाधा डालने पर ट्रंप ने ईरान को दी ये खुली चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने का ऐलान किया है. चलिए जानते हैं ट्रंप ने ईरान को मिशन में बाधा डालने पर क्या चेतावनी दी है.
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने सोमवार से प्रोजेक्ट फ्रीडम नाम का नया नौसैनिक मिशन शुरू करने की घोषणा की है. इस मिशन का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे विदेशी जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है ताकि वे वहां से निकल सकें.
ट्रंप ने कहा कि कई जहाज मौजूदा संघर्ष के कारण लंबे समय से फंसे हुए हैं. उनका कहना है कि ये जहाज किसी भी युद्ध का हिस्सा नहीं हैं और सिर्फ हालात खराब होने की वजह से बीच समुद्र में अटक गए हैं. इन जहाजों में मौजूद क्रू मेंबर्स के सामने खाने-पीने के सामान और जरूरी संसाधनों की कमी की समस्या बढ़ रही है.
ट्रंप ने ईरान को क्या दी है चेतावनी?
ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी. उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी ने इन जहाजों को निकालने की कोशिश में बाधा डाली तो अमेरिका सख्त जवाब देगा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना प्रभावित देशों के जहाजों को सुरक्षा देगी ताकि वे सामान्य व्यापारिक गतिविधियां फिर से शुरू कर सकें.
हालांकि कड़े बयान के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी अधिकारियों और ईरान के बीच बातचीत जारी है. उन्होंने इन चर्चाओं को सकारात्मक बताया और कहा कि हालात को शांत करने के लिए नए प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है.
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने क्या कहा?
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच संपर्क बना हुआ है. इससे उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले दिनों में तनाव कम करने को लेकर कोई बड़ा फैसला हो सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्यों हो रहा विवाद?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है. फरवरी के आखिर से यहां हालात खराब होने के बाद कई जहाज फंस गए हैं. इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है.
इस तनाव का असर तेल बाजार पर भी साफ दिख रहा है. पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई. अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ी हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ रहा है.
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