डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालते ही अपने चुनावी वादों में से एक निर्वासन योजना पर कड़ाई से काम करने का मन बना चुके हैं. निर्वासन योजना के तहत अब अमेरिका में रह रहे करीब 18,000 भारतीयों पर अमेरिका से निष्कासन का खतरा मंडराने लगा है. यह नीति ट्रंप के राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के बाद लागू की जाएगी. यह कदम अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़े निर्वासन अभियानों में से एक माना जा रहा है.
18 हजार भारतीयों पर मंडराया निर्वासन का खतरा
अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की रिपोर्ट के अनुसार, 18,000 भारतीयों को निष्कासन सूची में शामिल किया गया है. इनमें ज्यादातर लोग गुजरात, पंजाब और आंध्र प्रदेश से हैं. कुल मिलाकर, अमेरिका में भारतीय अप्रवासियों की संख्या लगभग 7,25,000 है, जो मैक्सिको और एल साल्वाडोर के बाद तीसरे स्थान पर है.
चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए निष्कासन
अक्टूबर 2024 में, अमेरिका ने भारतीय नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए चार्टर्ड फ्लाइट का इस्तेमाल किया. यह कदम अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और भारतीय सरकार के सहयोग से उठाया गया. यह मामला उन हजारों भारतीयों की कठिनाइयों को उजागर करता है, जो वर्षों से अपनी स्थिति को वैध करने की कोशिश कर रहे हैं.
अवैध सीमा पार करने वालों की संख्या बढ़ी
पिछले तीन वित्तीय वर्षों में, औसतन 90,000 भारतीयों को अमेरिका की सीमा पार करते समय पकड़ा गया है. ये आंकड़े अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश करने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाते हैं.
'असहयोगी' देशों की लिस्ट में भारत
ICE ने भारत को 'असहयोगी' देशों की सूचि में रखा है. इसकी वजह है भारतीय अधिकारियों द्वारा नागरिकता सत्यापन, यात्रा दस्तावेज जारी करने और निष्कासन प्रक्रिया में देरी. ICE के अनुसार, असहयोगी देशों की सूची में भारत सहित 15 अन्य देश भी शामिल हैं, जैसे कि चीन, रूस, पाकिस्तान, और ईरान.
निष्कासन सूची में अन्य देशों की स्थिति
ICE की रिपोर्ट के अनुसार, सूची में सबसे अधिक लोग होंडुरास (2,61,651) से हैं, उसके बाद ग्वाटेमाला, मैक्सिको, और एल साल्वाडोर का स्थान आता है.
निष्कासन की नीति का प्रभाव
डोनाल्ड ट्रंप की यह नीति न केवल अप्रवासियों के लिए एक गंभीर समस्या खड़ी कर रही है, बल्कि यह अमेरिका और भारत के बीच कूटनीतिक संबंधों पर भी असर डाल सकती है. इस नीति के चलते हजारों भारतीयों को अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है.