डीजल संकट या चुनाव का दबाव? रूस से डील कराने पहुंचे ट्रंप के दूत; पुतिन से की मुलाकात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ रूस के सेंट पीट्सबर्ग पहुंचे हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होनी है.

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Km Jaya

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ अचानक रूस के सेंट पीट्सबर्ग पहुंचे हैं. यहां उनकी मुलाकात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होनी है. विटकॉफ का रूस दौरा ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए शांति प्रस्तावों पर बातचीत तेज कर रहा है. हालांकि, उनकी इस अचानक यात्रा के समय को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

विटकॉफ की यात्रा का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाना और संभावित शांति समझौते का रास्ता तलाशना बताया जा रहा है. लेकिन इसके साथ ही अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतें और 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव भी चर्चा में हैं. इसलिए उनकी पुतिन से मुलाकात को यूक्रेन युद्ध के अलावा अमेरिका की घरेलू राजनीति और ऊर्जा संकट के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.

शांति प्रस्तावों पर हुई चर्चा 

विटकॉफ रूस पहुंचने से एक दिन पहले नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मिले थे. इस बैठक में यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों के साथ शांति प्रस्तावों पर चर्चा हुई. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई और यूक्रेन की ओर से कई नए विचार और प्रस्ताव रखे गए.


देश की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने की योजना

ओस्लो की बातचीत में यूक्रेन की सुरक्षा के लिए लंबी अवधि की गारंटी, युद्ध के बाद देश की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने की योजना और यूरोप की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल रहे. अब विटकॉफ इन चर्चाओं के नतीजों को रूस के सामने रखेंगे. रूसी सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, पुतिन और विटकॉफ की मुलाकात बुधवार को दिन के पहले हिस्से में तय थी. सेंट पीट्सबर्ग के पुलकोवो एयरपोर्ट पर क्रेमलिन के दूत किरिल दिमित्रिएव ने विटकॉफ का स्वागत किया.

डीजल संकट ने बढ़ाई ट्रंप की चिंता

अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतें ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा घरेलू मुद्दा बनती जा रही हैं. इसी महीने ट्रंप ने रूस से डीजल सप्लाई को लेकर समझौते का ऐलान किया था. इसका मकसद ईंधन की कीमतों पर दबाव कम करना बताया गया. रूस के खिलाफ अमेरिका की पुरानी प्रतिबंध नीति के बीच यह कदम अहम बदलाव के तौर पर देखा गया.

3 नवंबर के मिडटर्म चुनाव से पहले महंगाई और ईंधन की कीमतें अमेरिकी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने घरेलू आर्थिक दबाव कम करने की चुनौती भी है. हालांकि, रूस से डीजल सप्लाई का समझौता अमेरिकी बाजार में ईंधन की कीमतों को कितनी राहत देगा, इसे लेकर अभी सवाल बने हुए हैं.

जेलेंस्की के साथ भी आसान नहीं रही राह

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और ट्रंप के बीच संबंधों में भी कई बार तनाव देखने को मिला है. ट्रंप यूक्रेन पर रूस के साथ समझौता करने के लिए दबाव डालते रहे हैं. वहीं, जेलेंस्की का कहना है कि किसी भी शांति समझौते में यूक्रेन की सुरक्षा और भविष्य की गारंटी से समझौता नहीं किया जा सकता.

यूक्रेन और उसके सहयोगी चाहते हैं कि किसी भी शांति समझौते में मजबूत सुरक्षा गारंटी शामिल हो, ताकि रूस भविष्य में दोबारा हमला न कर सके. यूक्रेन ने अपने क्षेत्र का हिस्सा रूस को सौंपने की मांग को भी खारिज किया है.

रूस की मांगें 

दूसरी तरफ, रूस की मांगें इससे काफी अलग हैं. मॉस्को चाहता है कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास क्षेत्र का पूरा इलाका रूस को सौंप दे. इसके अलावा रूस यूक्रेन की सेना का आकार कम करने और नाटो में शामिल नहीं होने की प्रतिबद्धता की मांग कर रहा है.

ऐसे में शांति समझौते की राह अभी भी बेहद मुश्किल दिखाई देती है. विटकॉफ की कोशिश होगी कि जेलेंस्की और उनके यूरोपीय सहयोगियों के साथ हुई बातचीत के आधार पर रूस के साथ आगे की चर्चा का रास्ता तैयार किया जाए. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि पुतिन यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ी मांगों पर कितना लचीला रुख अपनाते हैं.

अचानक यात्रा क्यों है अहम?

विटकॉफ की यह अचानक यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका एक साथ कई मोर्चों पर दबाव में है. एक तरफ ट्रंप प्रशासन यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाश रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश में ईंधन कीमतों और आगामी चुनाव का दबाव है. ऐसे में पुतिन के साथ होने वाली बातचीत यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है कि यूक्रेन युद्ध को रोकने की दिशा में अमेरिका की कोशिशें आगे बढ़ती हैं या फिर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहते हैं.