ईरान में स्कूल पर किसने दागी थी मौत की मिसाइल? ट्रंप का अमेरिका की भूमिका से इनकार, बोले- ‘यह हमारी नहीं थी’
ईरान में 28 फरवरी को हुए घातक स्कूल हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने अमेरिका की भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे लगे कि यह अमेरिकी मिसाइल थी.
ईरान के दक्षिणी शहर मीनाब में 28 फरवरी को हुए घातक स्कूल हमले को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है. इस हमले में 175 से अधिक बच्चों और शिक्षकों की मौत हुई थी. घटना उस समय हुई थी जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा रही थी.अब इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया बयान सामने आया है. ट्रंप ने अमेरिका की भूमिका से इनकार करते हुए कहा है कि उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि स्कूल पर हमला करने वाली मिसाइल अमेरिकी थी. उन्होंने कहा कि उस दौरान कई दिशाओं से मिसाइलें दागी जा रही थीं, इसलिए जिम्मेदारी तय करना आसान नहीं है.
ट्रंप ने अमेरिका की भूमिका पर उठे सवालों को किया खारिज
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि स्कूल पर हमला करने वाली मिसाइल अमेरिका की थी. उन्होंने कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में लगातार मिसाइलें दागी जा रही थीं और ऐसे माहौल में किसी एक हमले की जिम्मेदारी तय करना बेहद मुश्किल हो सकता है. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह हमला अमेरिका ने किया था.
हमले में गई थी बड़ी संख्या में बच्चों की जान
ईरानी अधिकारियों के अनुसार 28 फरवरी को हुए इस हमले में 175 से अधिक बच्चे और शिक्षक मारे गए थे. घटना उस समय हुई थी जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की जा रही थी. इस हमले ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी थी और स्कूलों तथा नागरिक क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे.
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जांच रिपोर्ट ने बढ़ाई थी अमेरिकी सेना की मुश्किलें
मार्च में सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिकी सेना की प्रारंभिक आंतरिक जांच में इस संभावना पर विचार किया गया कि हमला अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का परिणाम हो सकता है. बताया गया था कि पुराने लक्ष्यीकरण डेटा के इस्तेमाल की आशंका भी जांच के दायरे में है. हालांकि, पेंटागन ने अब तक किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा था विरोध
घटना के बाद कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई थी. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इस हमले को बेहद भयावह बताया था. अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत किसी स्कूल को जानबूझकर निशाना बनाना युद्ध अपराध माना जाता है. यही वजह है कि इस घटना ने वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की थीं.
जांच पूरी होने का इंतजार
ट्रंप ने यह भी कहा कि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी. उन्होंने दोहराया कि किसी ने जानबूझकर स्कूल को निशाना नहीं बनाया होगा. फिलहाल दुनिया की नजर इस जांच पर टिकी हुई है, क्योंकि इसके नतीजे न केवल जिम्मेदारी तय करेंगे बल्कि भविष्य की सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं.