डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा, मीडिया को दिखाया ‘उपलब्धियों’ का बंडल और फिर...

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है. इस दौरान उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए एक मोटे कागज़ों का बंडल दिखाया, जिसपर उपलब्धियां लिखी हुई थी.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा हो गया. इस एक साल में उन्होंने ना केवल अमेरिका बल्कि पूरे दुनिया से खुद को रुबरू करवाया. वहीं इस खास मौके पर राष्ट्रपति ट्रंप ने एक मोटे कागज़ों का बंडल दिखाया, जिस पर ऊपर बड़े अक्षरों में उपलब्धियां लिखा था.

ट्रंप ने इस बंडल को दिखाते हुए उसे ज़मीन पर फेंक दिया. जिससे ज़ोरदार आवाज़ हुई और वहां मौजूद लोग थोड़ा शांत हो गए. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ किताब ही नहीं पूरा हिसाब है. हालांकि ट्रंप ने फिर उन्होंने मगशॉट्स के ढेर भी नीचे फेंक दिए. जिनके बारे में उन्होंने कहा कि ये उन लोगों की तस्वीरें हैं जिन्हें कथित अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया था. इस ड्रामेटिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बड़ा बाइंडर क्लिप भी फेंका गया.

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप हमेशा कुछ ऐसा करने की कोशिश करते हैं कि सभी लोगों का ध्यान उनपर ही रहें. एक-एक कर के सामानों को नीचे फेंकते हुए उन्होंने एक पल के लिए रिपोर्टर से पूछा कि आप लोग इससे बोर तो नहीं हो रहे हैं, है ना? हालांकि जब उन्हें लगा कि रिपोर्टर्स का ध्यान भटक रहा है, तो ट्रंप ने उनसे कहा कि वे भाग्यशाली हैं कि उन्होंने सिर्फ लगभग 100 मगशॉट्स ही दिखाए हैं.

फिर उन्होंने उस ढेर को ब्रीफिंग रूम के फर्श पर गिरा दिया. बाद में उन्होंने उपलब्धियां लिखे कागजों का एक और मोटा बंडल हवा में उठाया. उन्होंने कहा कि यह भी बड़ी चीज़ें हैं. हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन देश है और फिर उन्हें भी जमीन पर फेंक दिया. कुल मिलाकर उन्होंने मीडिया का ध्यान अपनी ओर रखने के लिए कुछ-कुछ देर पर सामान गिराते रहें. 

यूरोप देशों के सेाथ बिगड़ी बात

डोनाल्ड ट्रंप और यूरोप के देशों के बीच इन दिनों ग्रीनलैंड को लेकर विवाद चल रहा है. ट्रंप वेनेजुएला पर कब्जा करने के बाद बार-बार ग्रीनलैंड को चेतावनी दे रहे हैं. हालांकि यूरोपियन देशों ने उनके इस धमकी का रिप्लाई करते हुए ऐसा करने से मना किया है. लेकिन ट्रंप ने उन्हें शांत कराने के लिए 10 प्रतिशत टैरिफ का ऐलान कर दिया, हालांकि इसका ज्यादा असर नहीं हुआ. यूरोप के देश अभी भी उनके इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध जता रहे हैं.