बेंजामिन नेतन्याहू की मौत का सच क्या? सोशल मीडिया पर सनसनीखेज दावों से दुनिया भर में मची भारी खलबली
सोशल मीडिया पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं. ईरानी हवाई हमलों में उनके मारे जाने के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है.
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत को लेकर सनसनीखेज दावे किए जा रहे हैं. भारत सहित पूरी दुनिया में इन अफवाहों ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है. कई पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरानी हवाई हमलों में नेतन्याहू की जान चली गई है. हालांकि इजरायली अधिकारियों या किसी विश्वसनीय समाचार संगठन ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है.
फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कई वीडियो साझा किए जा रहे हैं, जिनमें भारी विस्फोट और मिसाइल हमले दिखाए गए हैं. इन वीडियो को नेतन्याहू की मौत के सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है. कैप्शन में दावा किया जा रहा है कि हवाई हमलों में विशेष रूप से सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया गया. हालांकि, तकनीकी जांच में पाया गया कि इनमें से अधिकांश वीडियो पुराने संघर्षों के हैं, जिन्हें केवल गलत संदर्भ में दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है.
निशाने पर अन्य इजरायली नेता
दुष्प्रचार का यह सिलसिला केवल प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं है. अफवाहों के इस दौर में नेतन्याहू के भाई इद्दो नेतन्याहू और इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर की मौत की खबरें भी फैलाई जा रही हैं. सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि वे भी इन्हीं कथित हमलों में मारे गए हैं. प्रधानमंत्री की तरह ही इन रिपोर्टों का भी कोई आधिकारिक आधार नहीं है और किसी भी प्रामाणिक सरकारी चैनल ने इसकी पुष्टि नहीं की है.
आधिकारिक पुष्टि का अभाव
इतने व्यापक स्तर पर अफवाहें फैलने के बावजूद इजरायल सरकार या अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने नेतन्याहू की मृत्यु की कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की है. इसके विपरीत 9 मार्च को प्रधानमंत्री नेतन्याहू को स्वास्थ्य मंत्री हैम काट्ज के साथ नेशनल हेल्थ कमांड सेंटर का दौरा करते देखा गया था. वहां उन्हें 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के दौरान स्वास्थ्य प्रणाली की गतिविधियों के बारे में ब्रीफिंग दी गई थी. यह साक्ष्य साफ करता है कि उनके मारे जाने के वायरल दावे पूरी तरह निराधार हैं.
संघर्ष के दौरान बढ़ती गलत सूचनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध या राजनीतिक तनाव के समय गलत सूचनाएं बहुत तेजी से फैलती हैं. सनसनीखेज सुर्खियां और चौंकाने वाले दावे सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान जल्दी खींचते हैं. ऐसी स्थितियों में यूजर्स अक्सर बिना सच्चाई जांचे जानकारी साझा कर देते हैं. एडिट किए गए वीडियो क्लिप और भ्रामक कैप्शन के जरिए एक ऐसा माहौल तैयार किया जाता है, जिससे आम लोगों को लगता है कि कोई बहुत बड़ी घटना वास्तव में घट चुकी है.
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