लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से हुआ खारिज
लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया है. इस मुद्दे पर बहस की शुरुआत कांग्रेस नेता तरुण गोगोई ने की. उन्होंने स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विपक्ष की चिंताओं को सदन के सामने रखा
नई दिल्ली: लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाया गया प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया. सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद जब मतदान कराया गया तो प्रस्ताव के पक्ष में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला. मतदान के बाद यह प्रस्ताव गिर गया और स्पीकर अपने पद पर बने रहे.
यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने सदन में पेश किया था. विपक्ष की ओर से स्पीकर के कामकाज को लेकर सवाल उठाए गए थे. प्रस्ताव आने के बाद लोकसभा में इस पर चर्चा के लिए कुल 10 घंटे का समय तय किया गया था ताकि दोनों पक्ष अपनी बात विस्तार से रख सके.
स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल
इस मुद्दे पर बहस की शुरुआत कांग्रेस नेता तरुण गोगोई ने की. उन्होंने स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विपक्ष की चिंताओं को सदन के सामने रखा. इसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया और सरकार का पक्ष रखा.
दूसरे दिन भी जारी रही बहस
चर्चा का दूसरा दिन भी काफी गरम माहौल में गुजरा. सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच कई बार तीखी बहस देखने को मिली. इसी दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने भी चर्चा में हिस्सा लेते हुए सरकार की ओर से अपनी बात रखी और विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया.
हंगामे के बीच हुआ मतदान
बहस के दौरान विपक्ष की ओर से लगातार नारेबाजी और हंगामा भी देखने को मिला. इसी माहौल में ध्वनिमत से मतदान कराया गया. सदन में बहुमत सरकार के पक्ष में रहा और स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव गिर गया. मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस समय सदन की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने लोकसभा की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. इस तरह दो दिनों तक चली बहस के बाद यह मामला समाप्त हो गया.
अमित शाह ने क्या कहा?
लोकसभा में आज राजनीतिक गरमागरमी के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर ओम बिरला के प्रति विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी बात रखी. शाह ने स्पष्ट किया कि वे आज कोई राजनीतिक आरोप नहीं लगाएंगे बल्कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का कड़ा जवाब देंगे. उन्होंने सदन की मर्यादा और नियमों की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि स्पीकर का पद अत्यंत निष्पक्ष और संवैधानिक सुरक्षा से लैस होता है जिस पर सवाल उठाना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.
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