यूक्रेन पर रूस के हमले को फरवरी में पूरे तीन साल हो जाएंगे. रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण किए जाने के बाद से न केवल युद्ध के मोर्चे पर स्थिति कठिन बनी हुई है, बल्कि युद्ध से प्रभावित परिवारों में भी कई गहरे सामाजिक परिवर्तन हो रहे हैं. इन परिवर्तनों में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित कर रहे हैं तलाक के मामलों में वृद्धि. युद्ध के कारण उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों ने यूक्रेन में परिवारों की स्थिरता को खतरे में डाल दिया है, और इसका सबसे बड़ा असर शादीशुदा जोड़ों पर पड़ा है.
युद्ध का असर दंपतियों पर
यूक्रेन में युद्ध के शुरू होने के बाद, कई दंपतियों के जीवन में भारी उतार-चढ़ाव आया है. उदाहरण के तौर पर, ओक्साना और आरतेम की युद्ध शुरू होने से 18 महीने पहले ही शादी हुई थी, लेकिन जब युद्ध शुरू हुआ तो आरतेम को यूक्रेनी सेना में शामिल होना पड़ा. इससे दोनों के बीच संपर्क सीमित हो गया, और ओक्साना को अपने पति से मिलने के लिए महीनों का लंबा सफर तय करना पड़ता था. इन असाधारण परिस्थितियों में दोनों ने जीवन में प्यार और साहस बनाए रखा, लेकिन यह स्थिति ज्यादातर जोड़ों के लिए बहुत कठिनाईपूर्ण रही.
युद्ध ने कई परिवारों के लिए न केवल शारीरिक दूरी पैदा की, बल्कि भावनात्मक दूरी भी बढ़ा दी. कई पत्नियां अपने पतियों के बिना अकेले परिवार चलाने के लिए मजबूर हैं, और यह मानसिक और शारीरिक दबाव तलाक के मामलों में वृद्धि का कारण बन रहा है.
यूक्रेन में तलाक के बढ़ते मामले
रूस के आक्रमण के बाद से यूक्रेन में तलाक की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. यूक्रेन के न्याय मंत्रालय के अनुसार, 2024 के पहले छह महीनों में तलाक के मामलों में 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक महत्वपूर्ण बढ़ोतरी है. इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण युद्ध के दौरान उत्पन्न हुई कठिनाइयां, भावनात्मक तनाव और सैनिकों की लगातार अनुपस्थिति को बताया जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध के कारण यूक्रेन से 60 लाख लोग पलायन कर चुके हैं, जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. जबकि पुरुषों को मार्शल लॉ के तहत देश छोड़ने की अनुमति नहीं है, यह स्थिति भी परिवारों में तनाव और टूटने के कारणों में से एक है.
युद्ध की मुश्किलों के बीच परिवारों का संघर्ष
बहुत सी महिलाएं अपनी शादी को बनाए रखने के लिए और परिवार को एकजुट रखने के लिए अपने पतियों से मिलने के लिए युद्ध क्षेत्र में जाने का जोखिम उठाती हैं. नतालिया, जो पश्चिमी यूक्रेन के लवीव से अपने पति से मिलने के लिए 1,230 किलोमीटर का सफर तय करती हैं, ने बताया कि यह यात्रा उन्हें अपने परिवार के साथ फिर से एकजुट महसूस करने का मौका देती है. हालांकि, इस यात्रा में उन्हें सैकड़ों किलोमीटर का खतरनाक सफर तय करना पड़ता है, और उन्हें बस और रेल के जरिए पहुंचने में काफी समय लगता है. इसके बावजूद, वह कहती हैं कि यह यात्रा उनके लिए एक "परिवार जैसा अनुभव" बन जाती है, हालांकि यह केवल कुछ घंटों के लिए होता है.
कर्तव्य और परिवार के बीच संतुलन
वर्तमान युद्ध ने सैनिकों और उनके परिवारों के बीच एक कठिन संतुलन बनाया है. सैनिक केवल साल में 30 दिन की छुट्टी पा सकते हैं, और इस दौरान उन्हें परिवार के साथ समय बिताने का सीमित अवसर मिलता है. युद्ध की परिस्थितियों में सैनिकों को अपनी पत्नियों और बच्चों से मिलने का समय केवल कुछ दिनों तक सीमित होता है, और इस अवधि में परिवार के अन्य मुद्दों पर ध्यान देना संभव नहीं होता.
यह स्थिति परिवारों में गहरी दरारें पैदा कर रही है. मारिया नाम की एक महिला ने बताया कि उसके पति युद्ध के बाद मानसिक रूप से बहुत प्रभावित हो गए थे, जिससे उनका रिश्ता टूट गया और अंततः तलाक हो गया. यह उदाहरण दर्शाता है कि युद्ध केवल सैनिकों के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी कठिनाइयाँ पैदा करता है, जिनमें भावनात्मक और मानसिक संकट शामिल होते हैं.
अंतहीन इंतजार
ओक्साना और आरतेम जैसे जोड़ों के लिए युद्ध का असर केवल शारीरिक दूरी तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भावनात्मक कठिनाइयों और निरंतर संघर्ष का कारण भी बना. ओक्साना ने कई बार गर्भपात का सामना किया, और अंततः उसने एक बेटे को जन्म दिया. हालांकि उसे उम्मीद थी कि उसका पति इस दौरान उसके साथ होगा, लेकिन युद्ध की वजह से उसे छुट्टी नहीं मिली. इस दर्दनाक अनुभव के बावजूद, वह अपने बेटे के साथ अपने पति से मिलने के लिए युद्ध क्षेत्र की ओर कदम बढ़ाती हैं. यह स्थिति यूक्रेन में युद्ध से प्रभावित कई अन्य परिवारों की कहानी का एक हिस्सा है, जहां तलाक, मानसिक तनाव, और परिवार के टूटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.